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ममेरी बहन स्नेहा की वर्जिन चूत-गांड बाथरूम में फाड़ी!

Family Sex Stories : ममेरी बहन स्नेहा की वर्जिन चूत बाथरूम में फाड़ी फिर गांड की भी ओपनिंग भाई के मोटे लंड ने किया! दोनों की Antarvasna इस Wild चुदाई से बुझी!

Family Sex Stories : ममेरी बहन स्नेहा की वर्जिन चूत बाथरूम में फाड़ी फिर गांड की भी ओपनिंग भाई के मोटे लंड ने किया! दोनों की Antarvasna इस Wild चुदाई से बुझी!

मेरा नाम रोहन है। उम्र 20 साल। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ और B.Tech थर्ड ईयर में पढ़ रहा हूँ। दिखने में औसत हैंडसम कहा जा सकता है। मेरा लंड करीब साढ़े छह इंच का है और मैं हमेशा से चूत का बड़ा शौकीन रहा हूँ।

लेकिन जो घटना मैं बताने जा रहा हूँ, वो महज कुछ दिनों पुरानी है और उसने मेरी जिंदगी का रुख ही बदल दिया।

ये कहानी मेरी और मेरी ममेरी बहन स्नेहा की है। स्नेहा B.Sc फर्स्ट ईयर में पढ़ती है। उम्र उन्नीस साल। दिखने में स्मार्ट, गोरी और जिस्म से भरी-पूरी।

उसके बोब्स 34 साइज के गोल और भारी हैं, कमर 28 की पतली, और गांड 36 की गोल-मटोल। जब वो जींस पहनती तो उसकी गांड का उभार साफ दिखता।

हम दोनों बचपन से बहुत अच्छे दोस्त थे। हर बात एक-दूसरे से शेयर करते, सिर्फ सेक्स वाली बातें छोड़कर।

कुछ दिन पहले की बात है। छुट्टियों में मैं अपने मामा के घर आया हुआ था। मामा-मामी किसी फंक्शन में गए हुए थे और उन्होंने मुझे घर पर ही रुकने को कहा।

घर में सिर्फ मैं और स्नेहा थे। हम दोनों पूरे दिन बातें करते, हँसते, पुरानी यादें ताजा करते। उस समय तक मेरे मन में उसके लिए कोई गलत ख्याल नहीं था। वो मेरी बहन जैसी थी।

शाम को हम दोनों लूडो खेलने बैठे। कमरे में हल्की रोशनी थी। स्नेहा ने आरामदायक नाइटी पहन रखी थी। खेलते-खेलते अचानक मेरा हाथ उसकी कमर पर लग गया।

जैसे ही मेरी हथेली उसकी नरम कमर को छूई, एक अजीब सी करंट सी लहर मेरे शरीर में दौड़ गई। मैंने अपना हाथ हटाया नहीं। बल्कि धीरे से उसके हाथ पर अपना हाथ रख दिया।

स्नेहा एकदम से काँप गई। वो ऐसे उठी जैसे किसी ने उसे बिजली का करंट दे दिया हो। उसका चेहरा लाल हो गया। वो बिना कुछ कहे कमरे से बाहर भाग गई।

मुझे भी ग्लटी महसूस हुई, लेकिन अंदर ही अंदर सेक्स की भूख जाग चुकी थी। मैं उसके पीछे गया।

बाथरूम का दरवाजा बंद था। अंदर से पानी की आवाज आ रही थी। मैंने सोचा वो नहाने चली गई है। मैं वापस आकर टीवी देखने लगा। अचानक बाथरूम से जोर की आवाज आई, जैसे कुछ गिर गया हो। मैं तुरंत भागा।

दरवाजा अधखुला था। अंदर स्नेहा फर्श पर गिरी हुई थी। उसका तौलिया खुल चुका था और वो पूरी तरह नंगी थी। पहली बार मैंने किसी लड़की को इतने करीब से नंगा देखा।

उसकी पीठ मेरी तरफ थी - पतली कमर, गोल गांड और जांघों का नजारा। मैं कुछ पलों के लिए स्तब्ध खड़ा रह गया।

“स्नेहा… क्या हुआ?” मैंने होश में आकर पूछा।

वो दर्द से कराह रही थी, “दिखता नहीं… मैं गिर गई। उठाओ मुझे… बहुत दर्द हो रहा है।”

मैंने झुककर उसे सहारा दिया और खड़ा किया। तौलिया अभी भी अधखुला था। उसके छोटे-छोटे गुलाबी निप्पल, सपाट पेट और बीच में हल्के बालों वाली गुलाबी चूत साफ दिख रही थी। मेरी नजरें वहीं अटक गईं। स्नेहा ने जल्दी से तौलिया खींच लिया और बोली, “बेशर्म… मैं तेरी बहन हूँ।”

मैंने सिर नीचे कर लिया। “माफ कर… मैंने जानबूझकर नहीं देखा।”

स्नेहा ने कहा, “मुझसे चला नहीं जा रहा। उठाकर कमरे में ले चल।”

मैंने उसे गोद में उठाया। उसका गीला शरीर मेरे सीने से चिपक रहा था। तौलिया बार-बार खिसक रहा था और उसके बोब्स मेरे हाथों से छू रहे थे।

मैं उसे बेडरूम में ले जाकर बिस्तर पर लिटा दिया। तौलिया उसके बोब्स पर आधा ही ढका था। गोल-गोल और सख्त। मेरा लंड पैंट में तन चुका था।

“रुको… मैं दवाई लाता हूँ,” मैंने कहा और बाथरूम से दर्द निवारक क्रीम ले आया।

मैंने उसकी कमर पर क्रीम लगाने शुरू किए। उंगलियाँ उसकी नरम त्वचा पर फिसल रही थीं। कमर से थोड़ा ऊपर जाते ही मेरा हाथ उसके बोब के निचले हिस्से से जा लगा।

एक अजीब सी गर्मी मेरे हाथ में दौड़ गई। मैंने खुद को रोकने की कोशिश की, लेकिन हाथ अपने आप उसकी तरफ बढ़ गया।

मैंने उसकी कमर पर होंठ रख दिए। हल्का सा किस। स्नेहा एकदम तन गई। उसके बोब्स मेरे चेहरे से छू गए। नरम और गरम। उसने मेरा चेहरा दोनों हाथों से पकड़ लिया।

हमारी आँखें मिलीं। फिर उसने धीरे से मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए।

पहले हल्का सा। फिर गहरा। उसकी जीभ मेरे मुँह में घुस आई। मैं भी जवाब देने लगा। मेरा एक हाथ उसके बोब पर था, दूसरा पेट पर। स्नेहा अजीब सी आवाजें निकाल रही थी — “उम्म… रोहन…”

किस लंबा होता गया। मैंने उसकी नाइटी का तौलिया पूरी तरह हटा दिया। उसके नंगे बोब्स मेरे सामने थे। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और चूसने लगा। स्नेहा की कमर उछल गई।

“आह्ह्ह… रोहन… चूसो… पी लो… बहुत दिन से मन कर रहा था…”

उसकी बात सुनकर मेरा दिमाग घूम गया। उसने खुद कहा था। मैंने दोनों बोब्स बारी-बारी से चूसे, काटे, मसले। स्नेहा के हाथ मेरे बालों में थे। वो मेरे सिर को अपनी छाती से चिपकाए हुए थी।

इतने में उसका हाथ मेरी पैंट पर आ गया। उसने ऊपर से ही मेरे तने हुए लंड को सहलाना शुरू कर दिया। फिर पैंट का बटन खोला और लंड बाहर निकाल लिया। उसके हाथ में पाकर वो और उत्तेजित हो गई।

“उफ्फ… कितना सख्त है…” उसने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।

मैं उसके पूरे शरीर पर किस करने लगा — गर्दन, पेट, बोब्स, फिर नीचे की तरफ। जब मेरा हाथ उसकी चूत पर गया तो वो जोर से सिहर उठी। उसकी चूत पहले से गीली थी। उंगली रखते ही पानी जैसा स्पर्श मिला।

“आह्ह्ह… रोहन… वहाँ… मत छोड़ो…”

मैंने उसकी चूत सहलाते हुए बोब्स चूसने जारी रखे। स्नेहा अब बेकाबू हो रही थी। उसकी टांगें खुल गई थीं। वो खुद मेरे हाथ को अपनी चूत पर दबा रही थी।

“रोहन… अब बस… डाल दो… मुझसे रहा नहीं जा रहा… जल्दी चोदो… फाड़ दो मेरी चूत…”

मैंने उसे सीधा लिटा दिया। उसकी टांगें फैलाकर मैंने पहले उसकी चूत पर किस किए। जीभ से चाटा। स्नेहा की आवाजें बदल गईं — “उम्म… आह्ह्ह… ऐसे ही… रोहन…”

मैंने लंड हाथ में लिया और उसकी चूत के मुँह पर रगड़ने लगा। स्नेहा खुद झटके मार-मार कर लंड अंदर लेने की कोशिश कर रही थी। मैंने नोक को छेद पर रखा और हल्का सा धक्का मारा।

सिर्फ थोड़ा सा अंदर गया था कि स्नेहा जोर से चिल्ला उठी। “आह्हhhhh… बाहर निकालो… बहुत दर्द हो रहा है… भैया…”

मैं रुक गया। उसकी चूत से हल्का खून निकल आया। वो कुँवारी थी। मैंने उसके माथे पर किस किया। “दर्द हो रहा है तो बोल… मैं रुक जाऊँगा।”

स्नेहा ने आँखें बंद करके सिर हिलाया।

“नहीं… डालो… लेकिन धीरे… पूरा…”

मैंने फिर से लंड की नोक उसकी चूत पर रखी। इस बार बहुत धीरे धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। स्नेहा की साँस रुक गई। उसके नाखून मेरे कंधों में गड़ गए।

“आह्हhhhh… रोहन… बहुत मोटा है… आह्ह्ह…”

मैंने रुककर उसके होंठ चूस लिए ताकि वो चीख न सके। फिर एक और धीमा लेकिन गहरा धक्का मारा। पूरा साढ़े छह इंच का लंड उसकी टाइट चूत में समा गया। स्नेहा के आँसू निकल आए। उसकी चूत से हल्का खून मेरे लंड पर लग रहा था।

मैंने बिना हिले उसके अंदर रहा। “अब ठीक है?”

स्नेहा ने हल्के से सिर हिलाया। “थोड़ा… अब… धीरे हिलाओ…”

मैंने बहुत धीमी गति से कमर चलानी शुरू की। हर धक्के पर स्नेहा की कराह निकल रही थी — पहले दर्द की, फिर धीरे-धीरे मजे की।

“आह्ह्ह… रोहन… अब… थोड़ा तेज… आह्ह्ह…”

मैंने स्पीड बढ़ा दी। स्नेहा की चूत अब थोड़ी ढीली पड़ने लगी थी। वो खुद अपनी गांड ऊपर उठा-उठा कर जवाब देने लगी। उसके गोल बोब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे। मैंने एक बोब मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह… रोहन… और जोर से चूसो… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो…”

मैंने उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और गहराई तक धक्के लगाने लगा। स्नेहा की आवाज अब खुल चुकी थी।

“आह्हhhhh… ओह्ह्ह… रोहन… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह… भैया… और तेज…”

“भैया” शब्द सुनकर मेरे अंदर और जोश आ गया। मैंने उसकी गांड पकड़कर जोर-जोर से पेलने शुरू कर दिए। बिस्तर चरचराने लगा। स्नेहा की चूत मेरे लंड को चूस रही थी। हर धक्के पर “छप-छप” की आवाज आ रही थी।

“रोहन… मैं… झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…” स्नेहा का शरीर तन गया। उसकी चूत ने मेरे लंड को कसकर जकड़ लिया और वो जोर से काँपते हुए झड़ गई।

उसके अंदर की गर्मी महसूस करके मैं भी खुद को रोक न सका।

“स्नेहा… ले… आह्ह्ह…” मैंने उसकी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया। गर्म वीर्य उसकी अंदर तक भर गया।

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। स्नेहा के आँसू अभी भी बह रहे थे, लेकिन मुस्कुरा रही थी। मैंने उसके माथे पर किस किया। “दर्द बहुत हुआ?”

उसने सिर मेरे सीने पर रख दिया। “शुरुआत में बहुत… लेकिन बाद में… बहुत अच्छा लगा। तुम virgin थे?”

मैंने हँसते हुए कहा, “अब नहीं रहा।”

हम दोनों कुछ देर चुपचाप लेटे रहे। फिर स्नेहा ने धीरे से मेरे लंड को छुआ। वो अभी भी आधा तना हुआ था। उसने मुस्कुराते हुए कहा, “एक बार और… इस बार मैं ऊपर से।”

मैं हैरान रह गया। “अभी?”

स्नेहा ने मुझे लिटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गई। उसने लंड को अपनी चूत पर सेट किया और धीरे-धीरे बैठने लगी। इस बार दर्द कम था। पूरा लंड अंदर जाते ही उसने आह भरी।

“आह्ह्ह… रोहन… अब पूरा अंदर है…”

वो ऊपर-नीचे होने लगी। उसके बोब्स मेरे चेहरे के सामने हिल रहे थे। मैंने दोनों को पकड़कर चूसना शुरू कर दिया। स्नेहा की गति बढ़ती जा रही थी।

“आह्ह्ह… रोहन… तुम्हारा लंड… मेरी चूत को चीर रहा है… आह्ह्ह… और जोर से…”

मैंने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए। स्नेहा झुककर मेरे होंठ चूसने लगी। दोनों की जीभ एक-दूसरे के मुँह में घूम रही थी। कमरे में सिर्फ हमारी साँसें और शरीर की आवाजें गूंज रही थीं।

“रोहन… मैं फिर से… आह्ह्ह…” स्नेहा का शरीर फिर काँपा। उसकी चूत ने दोबारा मेरे लंड को जकड़ लिया। मैंने भी स्पीड बढ़ा दी और दूसरी बार उसकी चूत में ही झड़ गया।

स्नेहा मेरे ऊपर गिर पड़ी। दोनों पसीने से तरबतर थे। उसने मेरे कान में फुसफुसाया, “आज के बाद… मैं तुम्हारी हूँ रोहन।”

मैंने उसके बाल सहलाए। “स्नेहा… ये गलत है… हम कजिन हैं…”

उसने सिर उठाया और मेरी आँखों में देखा। “पता है। लेकिन अभी रुकने का मन नहीं कर रहा।”

हम दोनों फिर से किस करने लगे। इस बार धीरे-धीरे, लंबे समय तक। फिर स्नेहा ने मेरे लंड को फिर से सहलाना शुरू कर दिया। वो तीसरी बार भी तैयार थी।

मैंने उसे कुतिया बना दिया। उसकी गोल गांड मेरे सामने थी। मैंने लंड उसकी गीली चूत में पीछे से डाल दिया और जोर से पेलने लगा। स्नेहा बिस्तर पकड़कर कराह रही थी।

“आह्ह्ह… रोहन… इस पोजीशन में और गहरा जा रहा है… आह्ह्ह… चोदो… अपनी बहन को चोदो…”

मैंने उसके बाल पकड़कर और तेज धक्के मारे। “स्नेहा… तेरी ये मोटी गांड… और टाइट चूत… मुझे पागल कर रही है…”

“तो पागल बन जा… फाड़ दे मेरी चूत… आह्ह्ह…”

मैंने उसकी गांड पर थप्पड़ मारे और जोर-जोर से चोदता रहा। स्नेहा की चीखें दबाने के लिए उसने तकिया मुँह में दबा लिया। थोड़ी देर बाद दोनों फिर से एक साथ झड़ गए।

इस बार हम पूरी तरह थक चुके थे। स्नेहा मेरे बगल में लेटकर मेरे सीने पर हाथ फेर रही थी। कमरे में सिर्फ पंखे की आवाज थी।

“रोहन… मामा-मामी कब तक आएंगे?” उसने धीरे से पूछा।

“देर रात तक शायद।”

स्नेहा मुस्कुराई। “तो फिर… थोड़ा आराम करके… एक बार और?”

मैंने उसके माथे पर किस किया। “तू थक नहीं रही?”

उसने मेरे लंड को छुआ जो फिर से हल्का तनने लगा था। “ये तो अभी भी तैयार है…”

हम दोनों हँस पड़े। उस रात हमने कुल चार बार संबंध बनाए। कभी धीरे, कभी जोर से। कभी वो ऊपर, कभी मैं। हर बार स्नेहा की कराहें और मेरे नाम का पुकारना कमरे में गूंजता रहा।

आखिर में जब हम दोनों पसीने और थकान से चिपके हुए सोने वाले थे, स्नेहा ने मेरे कान में कहा, “रोहन… आज के बाद जब भी आएगा… मुझे ऐसे ही चोदना।”

मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। खिड़की के बाहर रात गहरी हो चुकी थी। घर में सिर्फ हम दो ही थे… और एक ऐसा राज जो अब दोनों के बीच हमेशा के लिए रह गया था।

स्नेहा अभी भी मेरे ऊपर लेटी हुई थी। उसका शरीर पसीने से चमक रहा था। मेरे लंड से उसका और मेरा पानी मिला हुआ उसकी जांघों पर बह रहा था।

उसने मेरे कान में जीभ डालते हुए कहा, “रोहन… अभी तक तो सिर्फ चूत ली है… गांड भी ले लो न…”

मैं हैरान रह गया। “स्नेहा… तू पागल हो गई है क्या? अभी पहली बार हुई है और तू गांड देने को कह रही है?”

वो हँसी। उसकी हँसी में अब शर्म नाम की चीज नहीं बची थी।

“पागल नहीं… हवसी हो गई हूँ। तेरा लंड चूत में बहुत अच्छा लगा… अब गांड में भी महसूस करना चाहती हूँ।”

मैंने उसे पलट दिया। स्नेहा कुतिया बनकर बिस्तर पर झुक गई। उसकी गोल, मुलायम गांड मेरे चेहरे के सामने थी। मैंने दोनों हाथों से उसकी गांड के लोथड़े फैलाए।

बीच में उसका गुलाबी, सिकुड़ा हुआ छेद दिख रहा था। मैंने थूक लगाकर उंगली से दबाया। स्नेहा सिसक उठी।

“आह्ह्ह… रोहन… धीरे… पहली बार है वहाँ भी…”

मैंने और थूक लगाया, फिर लंड की नोक उसके गांड के छेद पर रख दी। धीरे से दबाव डाला। सिर्फ नोक अंदर गई थी कि स्नेहा जोर से चीख पड़ी।

“आह्हhhhh… दर्द… रोहन… बहुत दर्द हो रहा है… निकाल…”

मैं रुक गया। “निकाल दूँ?”

स्नेहा ने सिर हिलाया। “नहीं… डालो… पूरा… लेकिन धीरे…”

मैंने बहुत धीरे-धीरे धक्का मारा। आधा लंड उसकी गांड में घुस गया। स्नेहा के आँसू निकल आए। उसने बिस्तर की चादर मुँह में दबा ली। मैंने पूरा लंड अंदर तक धकेल दिया। उसकी गांड मेरे लंड को कसकर चूस रही थी।

“आह्हhhhh… फट गई… रोहन… तेरा लंड मेरी गांड फाड़ रहा है… आह्ह्ह…”

मैंने कुछ पल बिना हिले उसके अंदर रहा। फिर बहुत धीमी गति से हिलाना शुरू किया। हर धक्के पर स्नेहा की दबी हुई चीख निकल रही थी।

“आह्ह्ह… रोहन… और… थोड़ा तेज… आह्ह्ह… गांड में बहुत अजीब लग रहा है… लेकिन मजा भी आ रहा है…”

मैंने स्पीड बढ़ा दी। स्नेहा की गांड पर थप्पड़ मारते हुए पेलने लगा। उसके बोब्स नीचे झूल रहे थे। मैंने एक हाथ आगे बढ़ाकर उसका एक बोब पकड़ लिया और जोर से मसला।

“स्नेहा… तेरी ये गांड… चूत से भी टाइट है… लंड को निचोड़ रही है…”

“तो निचोड़ने दे… फाड़ दे मेरी गांड… आह्ह्ह… भैया… अपनी बहन की गांड चोद… आह्ह्ह…”

मैं पागल हो गया। उसके बाल पकड़कर जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर उसकी गांड पर थप्पड़ पड़ रहा था। स्नेहा अब खुद अपनी गांड पीछे की तरफ धकेल रही थी।

“आह्ह्ह… रोहन… और जोर से… मारो… थप्पड़ मारो… अपनी रंडी बहन को चोदो… आह्ह्ह…”

मैंने उसकी गांड लाल कर दी। लंड उसकी गांड में अंदर-बाहर हो रहा था। थोड़ी देर बाद स्नेहा जोर से काँप उठी। “आह्हhhhh… रोहन… मैं झड़ गई… गांड से झड़ गई… आह्ह्ह…”

उसकी गांड ने मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया। मैं भी रुक न सका। “स्नेहा… ले… तेरी गांड में…” और मैंने उसका गांड का छेद वीर्य से भर दिया।

दोनों थककर गिर पड़े। स्नेहा के दोनों छेदों से मेरा पानी बाहर बह रहा था। उसने मेरे लंड को हाथ में लिया और मुँह में डाल लिया। लार और वीर्य मिलाकर चूसने लगी।

“उम्म… तेरा लंड… चूत और गांड दोनों का स्वाद एक साथ… बहुत मजा आ रहा है…”

मैंने उसके बाल पकड़कर उसके मुँह में लंड ठोकना शुरू कर दिया। स्नेहा गले तक ले रही थी। आँखों से आँसू आ रहे थे लेकिन वो रुक नहीं रही थी। “ग्लक… ग्लक…” की आवाज आ रही थी।

थोड़ी देर बाद मैंने फिर से लंड खड़ा कर लिया। स्नेहा मुस्कुराई। “अब क्या? फिर से चूत या गांड?”

मैंने उसे उठाया और दीवार से सटा दिया। उसकी एक टांग अपने कंधे पर रखी और खड़े-खड़े उसकी चूत में लंड डाल दिया। इस पोजीशन में लंड बहुत गहरा जा रहा था। स्नेहा मेरे गले में बाँहें डाले कराह रही थी।

“आह्ह्ह… रोहन… बहुत अंदर… पेट तक जा रहा है… आह्ह्ह… चोदो… अपनी बहन को दीवार से लगाकर चोदो…”

मैं जोर-जोर से पेल रहा था। स्नेहा की पीठ दीवार से रगड़ खा रही थी। उसके बोब्स मेरे सीने से दब रहे थे। मैंने उसके कान में कहा, “स्नेहा… तू अब मेरी रंडी बन गई है… जब चाहूँगा चोदूँगा… समझी?”

“हाँ भैया… तेरी रंडी बहन… जब चाहो चोदना… चूत हो या गांड… दोनों तेरी हैं… आह्ह्ह…”

मैंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और फिर से उसकी चूत में झड़ गया। स्नेहा भी मेरे कंधे में मुँह दबाकर काँपते हुए झड़ गई।

अब दोनों पूरी तरह चूक चुके थे। हम बिस्तर पर गिरे और लंबे समय तक ऐसे ही पड़े रहे। स्नेहा मेरे लंड को हाथ में लिए हुए थी, जैसे छोड़ना ही न चाहती हो।

“रोहन… मामा-मामी आने वाले होंगे… नहा लेते हैं।”

हम दोनों बाथरूम गए। नहाते हुए भी हाथ रुक नहीं रहे थे। स्नेहा ने फिर से मेरे लंड को साबुन लगाकर हिलाया और मैंने उसकी चूत और गांड दोनों को अच्छे से धोया।

नहाकर बाहर आए तो शरीर तो साफ था, लेकिन आँखों में अभी भी हवस बाकी थी।

कपड़े पहनते समय स्नेहा ने मेरे पास आकर कहा, “रोहन… ये रात कभी मत भूलना। और जब भी आएगा… मुझे ऐसे ही रंडी बनाकर चोदना।”

मैंने उसके होंठ चूसते हुए कहा, “चोदूँगा… जब चाहूँगा… जहाँ चाहूँगा।”

उस रात बाद में मामा-मामी आ गए। हम दोनों सामान्य चेहरे बनाकर सो गए। लेकिन बिस्तर के नीचे, हमारे शरीर अभी भी एक-दूसरे की गर्मी महसूस कर रहे थे।

अगले दिन मैं दिल्ली वापस चला गया। लेकिन स्नेहा का मेसेज आता रहा - कभी अपनी नंगी फोटो, कभी सिर्फ इतना लिखती - “भैया… आज चूत बहुत गीली है… याद आ रहा है तेरा लंड।”

और मैं हर बार पढ़कर फिर से तन जाता।

तो दोस्तों कैसी लगी यह Bhai Bahan की Antarvasna वाली XXX Sex की Hindi Sex Story? कॉमेंट करके जरूर बताना! 

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