माँ की गांड की सील बेटे ने किचन में तोड़ी!
Maa Bete Ki Antarvasna : बेटे ने किचन में मम्मी को किया सेड्यूस! पहले चोदी चूत! फिर तेल लगाकर तोड़ी गांड की कुंवारी सील! और दोनों होल में भर दिया माल! Kamvasna
Maa Bete Ki Antarvasna : बेटे ने किचन में मम्मी को किया सेड्यूस! पहले चोदी चूत! फिर तेल लगाकर तोड़ी गांड की कुंवारी सील! और दोनों होल में भर दिया माल! Kamvasna
दोस्तों, मेरा नाम कबीर है। उम्र 23 साल। भोपाल में अपनी मम्मी के साथ रहता हूँ। पापा कपड़े का थोक बिजनेस करते हैं और साल के आठ-नौ महीने बाहर ही रहते हैं। घर में ज्यादातर सिर्फ हम दोनों होते हैं।
मम्मी का नाम सुनीता है। उम्र 44। थोड़ी सांवली, लेकिन शरीर ऐसा कि किसी भी मर्द का लंड तन जाए। फिगर 37-32-39। बड़े नरम बूब्स, गहरे भूरे निप्पल, पतली कमर और पीछे मोटी, हिलती-डुलती गांड।
चेहरा सुंदर, रसीले होंठ, कमर तक घने बाल। घर में साड़ी पहनती हैं - पल्लू हमेशा कम, ब्लाउज डीप नेक और बैकलेस। जब झुकती हैं तो क्लीवेज और नाभि दोनों एक साथ नज़र आते हैं।
मैं 16-17 साल की उम्र से ही मम्मी को अलग नज़र से देखने लगा था। कॉलेज के चार साल बाहर रहा। वहाँ दोस्तों की मम्मियों के साथ एक-दो बार हो भी गया, लेकिन किसी में वो बात नहीं थी जो मम्मी में है।
घर लौटने के बाद मम्मी बहुत खुश रहतीं। हाथ से खाना खिलातीं, गले लगातीं, कभी-कभी गाल पर हल्की किस कर देतीं। हर दिन मेरा सब्र कम होता जा रहा था।
पहले हफ्ते तो मैंने खुद को रोके रखा। लेकिन छोटी-छोटी बातें जमा होती रहीं।
एक शाम मम्मी टीवी देख रही थीं। साड़ी का पल्लू कंधे से सरक गया था। ब्लाउज का गहरा नेकलाइन और बूब्स का ऊपरी हिस्सा साफ दिख रहा था।
मैं पास बैठकर फोन चला रहा था, लेकिन नजर बार-बार वहीं जा रही थी। मम्मी ने पकड़ लिया।
“क्या देख रहा है इतनी देर से?” उन्होंने हल्के से पूछा।
“कुछ नहीं मम्मी… आपकी साड़ी अच्छी लग रही है आज।”
मम्मी मुस्कुराईं। “अच्छा… सिर्फ साड़ी?”
मैंने जवाब नहीं दिया। बस मुस्कुरा दिया। उस रात मैं बाथरूम में जाकर मुठ मारता रहा।
दूसरे दिन सुबह मम्मी झाड़ू लगा रही थीं। साड़ी कमर से काफी नीचे खिसकी हुई थी। जब वे झुकतीं तो गांड का गोलाकार हिस्सा साड़ी के अंदर से पूरी तरह उभर आता।
मैं किचन में खड़ा चाय बना रहा था और जानबूझकर देर तक देखता रहा। मम्मी मुड़ीं तो हमारी नजरें मिलीं। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस एक नॉटी सी मुस्कान दी और काम करती रहीं।
रात को खाना खाते समय मैंने जानबूझकर कहा, “मम्मी, पापा इतने दिन बाहर रहते हैं… आपको अकेला नहीं लगता?”
मम्मी ने चम्मच रोकी। “लगता है… लेकिन अब तो तू है न घर में।”
“मैं हूँ… लेकिन मैं पापा थोड़े ही हूँ।”
मम्मी ने मेरी तरफ देखा। आँखों में कुछ पल के लिए एक अजीब सी चमक आई। फिर उन्होंने नजरें फेर लीं। “बदमाश… खाना खा ले।”
ऐसे ही छोटे-छोटे पल जमा होते रहे।
कभी मम्मी नहाकर निकलतीं तो गीले बाल और पतली नाइटी में उनका बदन और कामुक लगता। कभी मैं देर रात पानी लेने जाता तो वे बिस्तर पर लेटी होतीं, साड़ी का पल्लू सरका हुआ, एक हाथ पेट पर।
मैं खड़ा देखता रहता। वे जानती थीं कि मैं देख रहा हूँ, लेकिन मना नहीं करती थीं। ये Antarvasna से भरपूर Family की Hindi Sex Stories आप वासना हब डॉट कॉम में पढ़ रहे है!
एक हफ्ते बाद एक और घटना हुई। मम्मी किचन में बर्तन धो रही थीं। मैं पीछे से गया और बिना कुछ कहे उनकी कमर में हाथ रख दिया। मम्मी सिहर उठीं लेकिन हटीं नहीं।
“क्या कर रहा है?” आवाज में हल्की सी कंपकंपी थी।
“कुछ नहीं… बस ऐसे ही।”
मेरा हाथ उनकी कमर पर था। साड़ी के नीचे कोई पेटीकोट नहीं था। मेरी हथेली उनकी नरम त्वचा महसूस कर रही थी। मम्मी कुछ पल चुप रहीं, फिर धीरे से बोलीं, “हाथ हटा… कोई देख लेगा।”
लेकिन “कोई” तो घर में था ही नहीं। मैंने हाथ नहीं हटाया। उल्टे थोड़ा और नीचे सरका दिया। मम्मी की साँस तेज हो गई। उन्होंने बर्तन धोना जारी रखा, लेकिन शरीर थोड़ा सा पीछे की तरफ झुक आया।
मेरा लंड पैंट में तन चुका था और उनकी गांड से छू रहा था।
उस रात दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी रही। लेकिन खामोशी के नीचे आग जल रही थी।
अगली सुबह वही किचन वाला सीन आया।
मैं सुबह उठा तो मम्मी आटा गूंध रही थीं। पीली स्लीवलेस बैकलेस ब्लाउज और हरी साड़ी। पल्लू बूब्स के बीच में फँसा था। पसीने से बदन चमक रहा था।
साड़ी कमर से नीचे खिसकी हुई, नाभि साफ दिख रही थी।
मैंने कुछ देर खड़े होकर देखा। फिर धीरे से पीछे गया। इस बार अचानक नहीं पकड़ा। पहले उनकी पीठ के पास खड़ा होकर बोला, “गुड मॉर्निंग मम्मी।”
“गुड मॉर्निंग बेटा… चाय बनाऊँ?” उन्होंने मुड़े बिना कहा।
“नहीं… आप आटा गूंधो, मैं पानी डाल देता हूँ।”
मैं उनके पास खड़ा हो गया।
इतना करीब कि मेरी छाती उनकी पीठ से छू रही थी। पानी की बोतल उठाई और आटे में डालने लगा। जानबूझकर कुछ बूँदें उनके बूब्स और क्लीवेज पर गिरा दीं। ब्लाउज गीला होकर चिपक गया। निप्पल उभर आए।
मम्मी ने नीचे देखा। “गिर गया पानी…”
“हाँ… ब्लाउज गीली हो गई। उतार दो वरना ठंड लग जाएगी।”
मम्मी ने पीछे मुड़कर मेरी तरफ देखा। इस बार उनकी आँखों में नॉटी मुस्कान के साथ एक चुनौती भी थी।
“गीला तूने किया है… तू ही जिम्मेदारी ले।”
मैंने बोतल रखी। दोनों हाथ उनकी कमर पर रख दिए। मम्मी हिलीं नहीं। मैंने धीरे से उन्हें अपनी तरफ घुमाया। हमारे चेहरे बहुत करीब थे। कुछ पल हम एक-दूसरे को सिर्फ देखते रहे।
फिर मैंने धीरे से आगे बढ़कर उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। ये XXX Desi Sex की Maa Ki Chudai Ki Kahani आप वासना हब डॉट कॉम में पढ़ रहे है!
पहला किस हल्का था। सिर्फ स्पर्श। मम्मी ने आँखें बंद कर लीं लेकिन जवाब नहीं दिया। दूसरा किस थोड़ा गहरा हुआ। तीसरे में उनकी जीभ ने मेरे होंठ खोले।
मैंने उन्हें कसकर पकड़ लिया। एक हाथ उनकी पीठ पर, दूसरा ब्लाउज के हुक पर। हुक खोले। ब्लाउज ढीला पड़ गया।
मम्मी ने किस तोड़ते हुए फुसफुसाया, “कबीर… क्या कर रहा है तू…”
“वही… जो दोनों चाह रहे हैं।”
मैंने ब्लाउज उनके कंधों से नीचे सरका दिया। बूब्स बाहर आ गए। मैंने दोनों को हाथों में लिया और मसलने लगा। मम्मी की कराहें हल्की-हल्की निकल रही थीं।
“आह्ह्ह… धीरे… अह्ह्ह…”
मैंने उनके एक निप्पल को मुँह में लिया और चूसने लगा। मम्मी का हाथ मेरे सिर पर आ गया। उन्होंने जोर से नहीं दबाया, बस रखा दिया। मैं दूसरे निप्पल पर गया। तेल की बोतल पास ही थी।
मैंने थोड़ा तेल निकाला और उनके बूब्स पर लगाकर दोनों हाथों से मसलने लगा। मम्मी की साँसें तेज हो गईं।
साड़ी का पल्लू मैंने पहले ही हटा दिया था। अब साड़ी भी खोल दी। मम्मी किचन में बिल्कुल नंगी खड़ी थीं। सुबह की रोशनी में उनका शरीर चमक रहा था। क्लीन शेव्ड चूत, मोटी गांड, तेल से चमकते बूब्स।
मैंने उन्हें काउंटर पर बिठाया। बूब्स चूसते हुए नीचे की तरफ गया। जांघें फैलाईं। पहले अंदरूनी हिस्से पर किस किए, फिर धीरे-धीरे ऊपर। जब जीभ उनकी चूत पर लगी तो मम्मी की कमर जोर से उछली।
“आह्हhhhh… कबीर… वहाँ… मत… अह्ह्ह… जीभ… अंदर…”
मैंने क्लिट को चूसा, होंठों को फैलाया और जीभ अंदर तक घुसाई। मम्मी के दोनों हाथ मेरे बालों में थे। वे मुझे अपनी चूत में और दबाने लगीं।
पंद्रह-बीस मिनट लगातार चाटने के बाद उनका शरीर अकड़ गया। उन्होंने मेरे बाल कसकर पकड़े और लंबी कराह के साथ झड़ गईं। उनका पानी मैंने पी लिया।
मम्मी हाँफ रही थीं। “तूने… होश उड़ा दिए… ऐसा… पहली बार…”
मैंने शॉर्ट्स उतारी। मेरा 8.5 इंच का मोटा लंड बाहर आया। मम्मी ने उसे देखा तो आँखें थोड़ी फैल गईं।
“इतना… बड़ा…”
“चूस के देख… फिर पता चलेगा।”
वे काउंटर से उतरकर घुटनों पर बैठ गईं। पहले लंड को हाथ में लिया, थूक लगाकर हिलाने लगीं। फिर नोक को मुँह में लिया। धीरे-धीरे गहराई तक ले जाने की कोशिश करने लगीं।
मैंने उनके बाल सहलाए। जबरदस्ती नहीं की। मम्मी खुद कोशिश कर रही थीं। लार बह रही थी। गले तक लेते समय उनकी आँखों में पानी आ जाता, लेकिन रुकती नहीं थीं।
“उम्म… ग्लक… उम्म…”
कुछ देर बाद उन्होंने लंड निकाला। साँसें फूल रही थीं। “अब… डाल… बर्दाश्त नहीं होता…”
मैंने उन्हें वापस काउंटर पर लिटाया। लंड उनकी गीली चूत पर रखा। आँखों में आँखें डाले धीरे से दबाव दिया। नोक अंदर गई। मम्मी ने साँस रोक ली।
“आह्ह्ह… धीरे… बड़ा है… अह्ह्ह…” ये Antarvasana वाली Free Hindi Sex Story की Kamvasna Stories आप वासना हब डॉट कॉम में पढ़ रहे है!
मैं रुक-रुककर अंदर जाता रहा। पूरा लंड समाते ही दोनों की कराहें एक साथ निकलीं। चूत गरम और टाइट थी। मैंने धीरे-धीरे धक्के शुरू किए। मम्मी की टांगें मेरे कमर के चारों तरफ लिपट गईं।
“आह्ह्ह… ऐसे… कबीर… जोर से… नहीं… अभी धीरे… आह्ह्ह… अब… थोड़ा तेज…”
स्पीड बढ़ रही थी। काउंटर हिल रहा था। मम्मी की कराहें अब दब नहीं पा रही थीं। उनकी गांड मेरे हाथों में थी। हर धक्के पर वे ऊपर की तरफ उठ रही थीं।
मैं काउंटर पर मम्मी को चोद रहा था। उनका शरीर मेरे नीचे था। हर धक्के पर उनके बड़े बूब्स उछल रहे थे। मैंने एक निप्पल मुँह में ले लिया और दाँतों से हल्के से काटते हुए पेलता रहा। मम्मी की टांगें मेरे कमर पर और कस गईं।
“आह्हhhhh… कबीर… गहरा… बहुत गहरा… आह्ह्ह… ऐसे ही… मत रुक…”
स्पीड अब तेज हो चुकी थी। काउंटर हिल रहा था। मम्मी की चूत से छप-छप की आवाज आ रही थी। उनकी गांड मेरे हाथों में थी। मैंने उन्हें थोड़ा और किनारे खींच लिया ताकि लंड पूरा अंदर तक जाए।
मम्मी की आँखें बंद थीं, मुँह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं।
कुछ देर बाद उनका शरीर तन गया। उन्होंने मेरे कंधे जोर से दबोच लिए और लंबी चीख के साथ झड़ गईं। उनकी चूत ने मेरे लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि मैं लगभग रुक गया।
लेकिन मैं रुका नहीं। उनके झड़ने के दौरान भी धक्के मारता रहा।
मम्मी हाँफ रही थीं। “रुक… थोड़ा… अह्ह्ह… बहुत हो गया…”
मैंने लंड बाहर निकाला। चूत खुली और चमक रही थी। मैं काउंटर पर लेट गया और मम्मी को अपनी तरफ खींच लिया।
“ऊपर बैठो मम्मी।”
वे समझ गईं। मेरे लंड के ऊपर आ गईं। खुद उसे अपनी चूत में सेट किया और धीरे-धीरे बैठ गईं। पूरा लंड अंदर जाते ही दोनों की साँसें एक हो गईं।
अब मम्मी खुद उछलने लगीं। पहले धीमे, फिर तेज। उनके बूब्स मेरे चेहरे के ठीक ऊपर थे। मैंने दोनों को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया।
“आआाह… कबीर… ऐसे… चूस… और जोर से उछलो… आह्ह्ह… तेरा लंड… पूरा अंदर… आह्ह्ह…”
दस-बारह मिनट तक वे ऊपर-नीचे होती रहीं। पसीने से उनका शरीर चमक रहा था। बाल जूड़े से निकलकर चेहरे पर चिपक गए थे। फिर वे थककर मेरे सीने पर गिर पड़ीं। लंड अभी भी अंदर था।
मैंने उन्हें धीरे से उतारा और खुद पीछे से खड़ा हो गया। मम्मी को काउंटर की तरफ झुका दिया। डॉगी स्टाइल। उनकी मोटी गांड मेरे सामने थी।
चूत से पानी टपक रहा था। मैंने लंड फिर से अंदर डाल दिया और जोर-जोर से पेलने लगा। एक हाथ से उनके बाल पकड़े, दूसरे से गांड पर थप्पड़ मारे।
“आह्हhhhh… थप्पड़… मार… कबीर… और जोर से… चोद… अपनी माँ को… आह्ह्ह…”
मैं थप्पड़ मारते हुए पेल रहा था। मम्मी की गांड लाल हो रही थी। हर धक्के पर उनके बूब्स काउंटर से टकरा रहे थे। अचानक मैंने लंड निकाला और तेल की बोतल उठाई। मम्मी ने गर्दन घुमाकर देखा।
“कबीर… क्या… करने वाला है?”
“गांड… आज लेनी है मम्मी।”
उनकी आँखों में थोड़ा डर था। “नहीं… कभी नहीं लिया… दर्द होगा… प्लीज…”
“आराम से करूँगा। सालों से इस गांड का दीवाना हूँ। आज बिना मारे नहीं जाऊँगा।”
मैंने खूब तेल उनके छेद पर लगाया। पहले एक उंगली धीरे से अंदर डाली। मम्मी सिसक उठीं। फिर दूसरी उंगली। धीरे-धीरे अंदर-बाहर किया। गांड खुलने लगी।
जब काफी नरम लगने लगा तो लंड पर तेल लगाकर नोक उनके छेद पर रखी।
“साँस छोड़ो मम्मी… अभी डाल रहा हूँ।”
मैंने धीमा लेकिन लगातार दबाव दिया। नोक अंदर घुसी। मम्मी ने काउंटर को जोर से पकड़ लिया।
“आईईईई… दर्द… कबीर… बहुत संकरा… आह्ह्ह… निकाल…”
मैं रुका नहीं। उनकी कमर सहलाते हुए और दबाव बढ़ाया। आधा लंड अंदर चला गया। मम्मी की आँखों से आँसू आ गए थे, लेकिन वे पीछे नहीं हट रहीं थीं।
फिर एक लंबा धक्का और पूरा लंड उनकी गांड में समा गया। ये Virgin Sex Stories आप वासना हब डॉट कॉम में पढ़ रहे है!
“आह्हhhhh… पूरा… अंदर… आ गया… फट गई… कबीर… अह्ह्ह…”
मैंने बिना हिले कुछ पल रखा। उनकी गांड मेरे लंड को कस रही थी। फिर बहुत धीमी गति से हिलाना शुरू किया। सिर्फ एक-दो इंच। हर छोटे धक्के पर मम्मी की आवाज निकल रही थी।
“आह्ह्ह… दर्द… अभी भी… लेकिन… अंदर तक… लग रहा है… थोड़ा… और… तेज… कर…”
मैंने स्पीड हल्की बढ़ा दी। अब लंड थोड़ा आसानी से चलने लगा था। मम्मी की कराहें दर्द से बदलकर मिश्रित होने लगीं। मैंने उनकी गांड पर हल्के थप्पड़ मारे।
“और… जोर से… मार… थप्पड़… अपनी माँ की गांड लाल कर दे… आह्ह्ह…”
मैंने बाल पकड़कर सिर पीछे खींचा और रफ्तार बढ़ा दी। अब धक्के पूरे होने लगे थे। हर बार लंड पूरा बाहर निकलता और फिर जड़ तक चला जाता। मम्मी की मोटी गांड मेरे पेट से टकरा-टकरा कर लहरा रही थी।
“आह्हhhhh… ऐसे… फाड़ दे… कबीर… माँ की गांड… आज तेरी हो गई… आह्ह्ह… गाली दे… और गंदी गाली दे…”
“ले रंडी… ले अपनी गांड में… आज तेरी गांड की इज्जत खत्म… बोल… तू क्या है?”
“रंडी… तेरी गांड वाली रंडी माँ… कुतिया… सिर्फ तेरे लंड की… आह्ह्ह… चोद… और तेज…”
मैंने स्पीड और बढ़ा दी। किचन में सिर्फ छप-छप और मम्मी की चीखें गूंज रही थीं। थोड़ी देर बाद मम्मी का शरीर तनने लगा।
“कबीर… मैं… झड़ने वाली हूँ… गांड से… जोर से… आह्हhhhh…”
उनकी गांड ने मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया। मम्मी लंबी चीख के साथ काँपते हुए गांड से ही झड़ गईं। मैं उनके झड़ने के दौरान भी धक्के मारता रहा।
फिर आखिरी कई गहरे धक्के मारे और उनकी गांड की गहराई में ही अपना गाढ़ा माल उड़ेल दिया। इतना ज्यादा कि बाहर तक बहने लगा।
मैं उनके ऊपर झुक गया। दोनों हाँफ रहे थे। मम्मी के शरीर पर पसीना, थप्पड़ों के निशान और मेरे माल की चमक थी। गांड से सफेद द्रव धीरे-धीरे बाहर आ रहा था।
लंबी खामोशी के बाद मम्मी ने कमजोर आवाज में कहा, “कबीर… आज… माँ की गांड… भी तेरी हो गई…”
मैंने उनके गले में चेहरा रखकर जवाब दिया, “अब तू सिर्फ मेरी माँ नहीं रही… तू मेरी औरत भी है।”
मम्मी ने मेरे बाल सहलाए। “पापा… जब आएँगे तब…”
“तब हम सावधान रहेंगे। बाकी दिन… तू मेरी है।”
हम दोनों नंगे ही किचन में खड़े रहे। बाहर सुबह की रोशनी फैल रही थी। घर में और कोई नहीं था।
उस दिन के बाद हमारी जिंदगी बदल गई। सुबह उठते ही कभी किचन में, कभी बेडरूम में, कभी बाथरूम में। मम्मी अब खुद पहल करने लगीं। कभी रात को मेरे कमरे में आ जातीं, कभी मैं उनके बिस्तर पर।
वे अब खुलकर गंदी बातें करतीं।
“आज गांड में लेना है… कल चूत में… कभी दोनों बारी-बारी से।” मैं उन्हें घर में नंगी रखने लगा। साड़ी सिर्फ तब पहनतीं जब बाहर जाना होता।
पापा जब आते तो दोनों सामान्य चेहरा बना लेते। लेकिन उनकी नजरें मिलते ही दोनों जानते थे कि रात को क्या होने वाला है।
दोस्तों, ये थी मेरी और मेरी माँ सुनीता की कहानी। जो शुरू हुई थी छोटी-छोटी निगाहों और डबल मीनिंग बातों से… और खत्म हुई एक ऐसे रिश्ते में जहाँ माँ और बेटा एक-दूसरे के सबसे गंदे राज बन गए।
तो दोस्तों कैसी लगी आप सभी को यह Antarvasna वाली Maa Bete की Family में हुई XXX Chudai Ki Hindi Sex Kahani? कॉमेंट करके जरूर बताए!
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