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सासु माँ साथ लेस्बियन और लंड का जुगाड़!

Family Sex : पत्नी प्रिया ने सास को अकेला देखकर छुआ, फिर चाटा, डाली चुत में उंगली! पति विक्रम ने देखा कई बार! सास को लंड के लिए किया तैयार! फिर हुई Wild चुदाई!

Family Sex : पत्नी प्रिया ने सास को अकेला देखकर छुआ, फिर चाटा, डाली चुत में उंगली! पति विक्रम ने देखा कई बार! सास को लंड के लिए किया तैयार! फिर हुई Wild चुदाई!

मेरा नाम विक्रम है। उम्र 29 साल। मैं इंदौर में एक IT कंपनी में काम करता हूँ। मेरी पत्नी प्रिया 27 साल की है — गोरी, लंबे बाल, 34-28-36 का फिगर और बहुत आकर्षक। हमारी शादी को चार साल हो चुके थे। हम दोनों यौन रूप से काफी सक्रिय थे।

मेरी माँ मीना 49 साल की हैं। पापा को सात साल पहले खो दिया था, इसलिए वो अकेली थीं। मैं उनका इकलौता बेटा हूँ, इसलिए वो हमारे साथ ही रहती हैं।

माँ अभी भी काफी सुंदर लगती हैं। उनका फिगर 36-30-38 का है। चेहरा पर उम्र के हल्के निशान हैं, लेकिन शरीर अभी भी जवां है।

प्रिया और माँ का रिश्ता शुरू से ही बहुत अच्छा था। प्रिया माँ को “माँ जी” कहकर बुलाती थी और हर काम में मदद करती। दोनों साथ किचन में खाना बनातीं, साथ टीवी देखतीं, कभी-कभी रात को देर तक बातें करतीं।

मुझे लगता था कि ये बस अच्छा सास-बहू रिश्ता है। लेकिन पिछले कुछ महीनों में मुझे हल्के-हल्के बदलाव नजर आने लगे थे।

एक शाम जब मैं ऑफिस से थोड़ा लेट लौटा, तो घर में हल्की सी अजीब सी खामोशी थी। लाइट्स डिम थीं। मैंने सोचा शायद दोनों सो गई हों। लेकिन बेडरूम के पास से हल्की सी आवाजें आ रही थीं।

मैंने धीरे से दरवाजे के पास जाकर सुना।

अंदर से प्रिया की आवाज आ रही थी, “माँ जी… आप इतनी मुलायम कैसे हो अभी भी…” फिर माँ की हल्की सी सिसकारी।

मैंने दरवाजा थोड़ा सा धकेला। अंदर जो नजारा था, उसने मुझे जड़ से हिला दिया।

प्रिया और माँ दोनों बिस्तर पर थीं। प्रिया ने माँ की नाइटी ऊपर कर रखी थी और उनके एक स्तन को मुँह में लिए हुए चूस रही थी। माँ की आँखें बंद थीं और उनके हाथ प्रिया के बालों में थे। प्रिया का दूसरा हाथ माँ की जांघों के बीच था।

मैं हैरान खड़ा रह गया। मेरा दिमाग काम करना बंद कर चुका था। गुस्सा भी आ रहा था, लेकिन साथ ही मेरा लंड भी पैंट के अंदर तनने लगा था। मैंने चुपचाप पीछे हट लिया और बाथरूम चला गया।

उस रात मैं देर तक सो नहीं पाया। प्रिया जब कमरे में आई तो उसने मुझे सामान्य तरीके से किस किया और सो गई। मैंने कुछ नहीं पूछा। लेकिन मन में सवाल घूम रहे थे।

अगले कुछ दिनों में मैं और ध्यान से दोनों को देखने लगा। सुबह जब प्रिया माँ को चाय देती, तो उसका हाथ माँ के कंधे पर जरूरत से ज्यादा देर तक रहता।

कभी-कभी दोनों किचन में खड़े होकर हँसते हुए बातें करतीं और प्रिया माँ की कमर पर हाथ रख देती। माँ भी अब प्रिया को पहले से ज्यादा छूने लगी थीं।

एक दोपहर मैं घर पर वर्क फ्रॉम होम कर रहा था। अचानक मुझे माँ के कमरे से हल्की सी कराह सुनाई दी। मैं धीरे से गलियारे में गया। दरवाजा अधखुला था।

प्रिया माँ के पीछे खड़ी थी। दोनों ने नाइटी पहन रखी थी। प्रिया के हाथ माँ के स्तनों पर थे और वो धीरे-धीरे मसल रही थी। माँ की साँसें तेज चल रही थीं।

प्रिया ने माँ के कान में कुछ फुसफुसाया, जिसे मैं सुन नहीं पाया। माँ ने आँखें बंद कर लीं और पीछे की तरफ प्रिया पर झुक गईं।

मैंने फिर से खुद को वहाँ से हटा लिया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। गुस्सा और उत्तेजना दोनों एक साथ चल रहे थे।

उस शाम जब प्रिया मेरे कमरे में आई, तो मैंने सीधे पूछ लिया।

“प्रिया… माँ के साथ क्या चल रहा है?”

प्रिया पहले तो सहम गई। फिर उसने दरवाजा बंद किया और मेरे पास आकर बैठ गई। उसने मेरा हाथ पकड़ा और बोली, “विक्रम… माँ जी बहुत अकेली थीं।

पापा के जाने के बाद उन्होंने किसी को छुआ तक नहीं। मैंने देखा कि वो कितनी तरस रही हैं छूने के लिए… प्यार के लिए। पहले तो मैं सिर्फ बातें करती थी, फिर एक दिन… बातें छूने में बदल गईं।”

मैं चुप रहा।

प्रिया ने आगे कहा, “मैं जानती हूँ ये गलत लगता है। लेकिन माँ जी अब खुश हैं। और… तुम्हें बुरे लगने के बावजूद… तुम्हारा शरीर तो प्रतिक्रिया दे रहा था ना उस दिन?”

मैंने उसकी तरफ देखा। वो जानती थी कि मैंने देखा है।

उस रात प्रिया ने मुझे बताया कि ये सब पिछले लगभग ढाई महीने से चल रहा है। वो माँ को धीरे-धीरे अपने करीब लाई थी। पहले सिर्फ मालिश, फिर किस, फिर एक-दूसरे को छूना।

अब दोनों नियमित रूप से एक-दूसरे से शारीरिक संबंध बना रही थीं।

मैंने पूछा, “तुम उन्हें मेरे बारे में भी सोचने के लिए उकसा रही हो?”

प्रिया मुस्कुराई। “अभी नहीं। लेकिन माँ जी अब काफी खुल चुकी हैं। अगर तुम चाहो… तो मैं उन्हें तैयार कर सकती हूँ।”

मेरा लंड उसकी बात सुनकर फिर से तन गया। प्रिया ने महसूस किया। उसने मेरी पैंट खोली और लंड को हाथ में ले लिया। “देखो… तुम भी तो चाहते हो।”

उस रात प्रिया ने मुझे जमकर संतुष्ट किया, लेकिन मेरा दिमाग बार-बार माँ और प्रिया के उस नजारे पर जा रहा था।

अगले दिनों में प्रिया ने और खुलकर माँ के साथ समय बिताना शुरू कर दिया। कभी दोनों बाथरूम में देर तक रहतीं। कभी दोपहर को माँ के कमरे का दरवाजा बंद हो जाता। मैं जानबूझकर घर पर रहने लगा।

एक दोपहर मैंने फिर से देखा। इस बार प्रिया माँ को बिस्तर पर लिटाए हुए थी। माँ की नाइटी पूरी खुली हुई थी। प्रिया उनके दोनों स्तनों को मसल रही थी और नीचे से उनकी चूत सहला रही थी। माँ की कराहें अब दबी हुई नहीं थीं।

“आह्ह्ह… प्रिया… वहाँ… और… आह्ह्ह…”

प्रिया ने माँ की टांगें फैला दीं और अपना चेहरा उनके बीच रख दिया। माँ ने प्रिया के बाल पकड़ लिए। कमरे में चाटने की हल्की आवाजें आने लगीं। माँ का शरीर तन गया और वो जोर से काँप उठीं।

मैंने वह दृश्य देखा और चुपचाप अपने कमरे में आकर दरवाजा बंद कर लिया। मेरा लंड फटने वाला था। मैंने खुद को शांत करने की कोशिश की, लेकिन दिमाग से वह नजारा नहीं जा रहा था।

उस शाम प्रिया मेरे पास आई। उसने मेरे चेहरे को देखा और समझ गई। उसने धीरे से कहा, “विक्रम… माँ जी अब काफी आगे बढ़ चुकी हैं। वो खुद मुझसे कहती हैं कि उन्हें और चाहिए।

मैं उन्हें धीरे-धीरे तुम्हारे बारे में सोचने के लिए तैयार कर रही हूँ।”

मैंने उसकी कमर पकड़ ली। “तुम सच में चाहती हो कि मैं… माँ के साथ…?”

प्रिया ने मेरे होंठों पर उंगली रख दी। “अभी जल्दबाजी मत करो। पहले उन्हें और खोलने दो। तुम बस देखते रहो… और अपनी भावनाओं को समझो।”

उस रात हम दोनों ने सेक्स किया, लेकिन प्रिया के व्यवहार में एक नया आत्मविश्वास था। वो मुझे कंट्रोल कर रही थी। और मैं… मैं खुद को रोक नहीं पा रहा था।

अगली सुबह नाश्ते की मेज पर माँ सामान्य लग रही थीं, लेकिन जब प्रिया ने उनके कंधे पर हाथ रखा तो माँ की आँखों में एक अलग चमक थी। प्रिया ने मेरी तरफ देखा और हल्के से मुस्कुरा दी।

मैं समझ गया था — ये खेल अब बस शुरू हुआ है।

अगले कुछ दिनों में घर का माहौल पूरी तरह बदल चुका था। प्रिया अब खुलकर माँ के साथ समय बिताने लगी थी। सुबह नाश्ता बनाने के दौरान भी दोनों की बातों में एक अलग तरह की नजदीकी महसूस होती।

कभी प्रिया माँ की कमर पर हाथ रखकर हँसती, कभी माँ प्रिया के बाल संवारते हुए उनकी पीठ सहलातीं।

मैं जानबूझकर घर पर ज्यादा समय बिताने लगा। वर्क फ्रॉम होम के बहाने मैं दोनों को और करीब से देखने लगा।

एक दोपहर की बात है। मैं अपने कमरे में लैपटॉप लेकर बैठा था। अचानक माँ के कमरे से हल्की सी कराह की आवाज आई। मैं धीरे से उठा और गलियारे में जाकर दरवाजे के पास खड़ा हो गया। दरवाजा अधखुला था।

अंदर प्रिया माँ को बिस्तर पर लिटाए हुए थी। माँ की नाइटी पूरी तरह खुली हुई थी।

उनके बड़े-बड़े स्तन बाहर निकले हुए थे। प्रिया उनके एक निप्पल को मुँह में लिए चूस रही थी और दूसरे को उंगलियों से मसल रही थी। माँ की साँसें तेज चल रही थीं।

“आह्ह्ह… प्रिया… हल्के से… बहुत सेंसेटिव हो गए हैं…” माँ की आवाज में मजा और शर्म दोनों थे।

प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा, “माँ जी, आप इतनी खूबसूरत हो अभी भी। आपके ये बोब्स… देखकर तो खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है।”

फिर प्रिया नीचे सरक गई। उसने माँ की जांघें फैलाईं और अपना चेहरा उनके बीच रख दिया। माँ ने प्रिया के बाल पकड़ लिए। कमरे में चाटने की आवाजें साफ सुनाई देने लगीं। माँ का शरीर हल्का-हल्का काँप रहा था।

“आह्ह्ह… वहाँ… जीभ वहीं रखो… आह्ह्ह…”

मैं दरवाजे के पीछे खड़ा अपने लंड को पैंट के ऊपर से दबाए हुए देख रहा था। गुस्सा अब लगभग खत्म हो चुका था। उसकी जगह एक अजीब सी उत्तेजना ने ले ली थी।

प्रिया ने माँ की चूत में दो उंगलियाँ डाल दीं और तेजी से हिलाने लगी। माँ की कराहें अब दब नहीं पा रही थीं। थोड़ी देर बाद माँ का शरीर तन गया और वो जोर से काँप उठीं।

प्रिया ने उनका पानी चाटते हुए कहा, “देखा माँ जी… आप कितनी आसानी से झड़ जाती हैं अब।”

माँ शर्म से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

प्रिया उनके पास जाकर लेट गई और उनके स्तनों को सहलाते हुए बोली, “माँ जी… विक्रम को जब ये सब पता चला तो वो गुस्से में नहीं था। वो… उत्तेजित हो गया था।”

माँ की आँखें चौड़ी हो गईं। “क्या…? उसने देख लिया था?”

प्रिया ने धीरे से सिर हिलाया। “हाँ। और उसने मुझसे कहा कि उसे बुरा तो लगा, लेकिन उसका शरीर कुछ और कह रहा था।”

माँ चुप हो गईं। प्रिया ने उनका हाथ पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया। “माँ जी, आप भी तो अकेली हैं इतने सालों से। विक्रम आपका बेटा है… लेकिन वो एक मर्द भी है। और आप अभी भी इतनी हसीन हो।”

माँ ने प्रिया का हाथ हटाया नहीं। उनकी उंगलियाँ प्रिया की गीली चूत पर थीं। प्रिया ने माँ की उंगलियों को अपनी चूत में धकेल दिया। “महसूस करो माँ जी… मैं कितनी गीली हो जाती हूँ जब आप मुझे छूती हो।”

उस दिन के बाद प्रिया ने माँ को और खुलकर विक्रम के बारे में बातें करनी शुरू कर दीं। कभी वो बताती कि विक्रम का लंड कितना मोटा है, कभी ये कि वो कितनी देर तक सेक्स कर सकता है।

माँ पहले शर्म से सुनतीं, लेकिन धीरे-धीरे उनकी साँसें तेज होने लगतीं।

एक शाम प्रिया ने माँ को अपने कमरे में बुलाया। मैं छिपकर सुन रहा था।

प्रिया ने माँ को बिस्तर पर बिठाया और उनकी नाइटी उतार दी। फिर खुद भी नंगी हो गई। दोनों एक-दूसरे के सामने थीं। प्रिया ने माँ के हाथों को अपने स्तनों पर रख दिया। “छुओ माँ जी… जैसे आप चाहो।”

माँ ने पहले हिचकिचाया, फिर दोनों हाथों से प्रिया के स्तन दबाने शुरू कर दिए। प्रिया ने माँ को चूम लिया।

दोनों का किस गहरा होता गया। प्रिया ने माँ की चूत में उंगली डाली और माँ ने प्रिया की। दोनों एक-दूसरे को सहलाते हुए कराहने लगीं।

“माँ जी… कभी सोचा है कि विक्रम का लंड कैसा होगा आपके अंदर?” प्रिया ने अचानक पूछ लिया।

माँ की उंगलियाँ रुक गईं। “प्रिया… ये मत कहो…”

“क्यों? आप सोचती हैं ना? जब मैं आपको चाटती हूँ तो आप आँखें बंद करके किसका चेहरा देखती हैं?”

माँ चुप रहीं। प्रिया ने उनकी चूत में उंगलियाँ और तेजी से चलानी शुरू कर दीं। माँ की कराहें बढ़ गईं। “बोलो माँ जी… किसका ख्याल आता है?”

माँ की आवाज काँप रही थी, “कभी… कभी विक्रम का…”

प्रिया मुस्कुराई। उसने माँ को चूमते हुए कहा, “तो फिर क्यों नहीं? वो भी आपको चाहता है। मैंने देखा है उसकी आँखों में।”

उस रात जब प्रिया मेरे पास आई, तो उसने सब कुछ बता दिया। “माँ जी अब लगभग तैयार हैं। बस एक धक्का और चाहिए।”

मैंने प्रिया को दीवार से सटा दिया और जोर से चोदा। मेरे दिमाग में माँ का नंगा शरीर घूम रहा था। प्रिया जानती थी। वो मेरे कान में बोल रही थी, “सोचो… माँ जी की टाइट चूत… उनके बड़े बोब्स… तुम उनके ऊपर होगे…”

मैं उसी ख्याल में झड़ गया।

अगले दिन प्रिया ने एक नया प्लान बनाया। उसने माँ को वाइन पिलाई। दोनों हल्के नशे में थीं। प्रिया ने माँ को लिविंग रूम के सोफे पर लिटा दिया और उनकी नाइटी पूरी खोल दी। फिर उसने मुझे इशारे से बुलाया।

मैं हॉल में खड़ा दूर से देख रहा था। प्रिया माँ की चूत चाट रही थी और माँ कराह रही थीं। प्रिया ने अचानक सिर उठाया और मेरी तरफ देखा। फिर माँ से बोली, “माँ जी… विक्रम देख रहे हैं आपको।”

माँ की आँखें खुलीं। वो घबरा गईं और अपने शरीर को ढकने की कोशिश करने लगीं। लेकिन प्रिया ने उनके हाथ पकड़ लिए। “मत ढको… उन्हें देखने दो। आप कितनी खूबसूरत लग रही हो।”

माँ की साँसें तेज चल रही थीं। उनकी नजर मुझ पर थी। शर्म और इच्छा दोनों साफ झलक रहे थे।

प्रिया ने माँ की टांगें और फैला दीं। “देखो विक्रम… माँ जी की चूत कितनी गीली है। सब तुम्हारे लिए।”

मैं वहीं खड़ा रहा। मेरा लंड पैंट में तना हुआ था। माँ ने मेरी तरफ देखा और धीरे से आँखें बंद कर लीं। प्रिया मुस्कुराई और फिर से माँ को चाटने लगी।

उस रात घर में एक अजीब सी खामोशी थी। सब समझ गए थे कि अब रेखा पार होने वाली है।

आगे की कहानी : "बेटे के सामने माँ की चूत खोल दी! वाइफ ने!"

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