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शादी में दोस्त की बहन काव्या की वर्जिन चूत चोदी!

Family Sex Story : शादी में दोस्त की बहन काव्या से छत पर मुलाकात, फिर उसकी वर्जिन चूत की चुसाई से शुरू हो कर Wild तरीके से पहली बार चुदाई की पूरी कहानी!

Family Sex Story : शादी में दोस्त की बहन काव्या से छत पर मुलाकात, फिर उसकी वर्जिन चूत की चुसाई से शुरू हो कर Wild तरीके से पहली बार चुदाई की पूरी कहानी!

दोस्तों, मेरा नाम आर्यन है। मैं ग्वालियर (मध्य प्रदेश) का रहने वाला हूँ और अभी इंजीनियरिंग सेकंड ईयर में पढ़ रहा हूँ। जनवरी 2014 की बात है। शहर में शादियों का मौसम जोरों पर था।

मेरे सबसे करीबी दोस्त आदित्य की बहन की शादी तय हुई थी। शादी का घर पूरी रौनक से भरा हुआ था। मैं वहाँ मदद करने गया था क्योंकि दोस्त का घर हो तो अपना ही समझो।

सुबह से सजावट, मेहमानों का आना-जाना, खाने-पीने का इंतजाम… सबमें हाथ बँटा रहा था। तभी दोपहर को आदित्य के मामा अपनी फैमिली के साथ आए। उनके साथ उनकी बेटी भी थी।

नाम था काव्या। उम्र लगभग मेरी ही… इक्कीस-बाईस की होगी। जैसे ही वो गेट से अंदर आई, मेरी नजरें उस पर अटक गईं।

काव्या गोरी थी, लंबे काले बाल कंधों तक खुले हुए। हल्की पेस्टल ब्लू सालवार-कमीज पहनी हुई थी जो उसके जिस्म पर खूब फिट थी। कमर पतली, और पीछे से गांड का उभार साफ दिख रहा था।

जब वो चली तो उसकी चाल में एक अलग ही अदा थी। मैं बिना पलक झपकाए देखता रह गया।

अचानक उसकी नजर मुझ पर पड़ी। वो मुस्कुराई और बोली, “आर्यन… क्या देख रहे हो?” मैं थोड़ा सकपका गया। कुछ और कहने वाला था लेकिन मुँह से निकल गया, “तुम बहुत अच्छी दिख रही हो।”

काव्या हल्के से शरमा गई। उसकी माँ ने उसे बुलाया, “काव्या इधर आ!” वो हँसती हुई चली गई, लेकिन जाते हुए एक बार फिर मुड़कर देखी। उस एक नजर ने मेरे अंदर कुछ हिला दिया।

 मैंने महसूस किया कि मेरा लंड पैंट के अंदर हल्का सा तनने लगा है। मैंने जल्दी से खुद को संभाला और काम में लग गया।

शाम को कार्यक्रम शुरू होने वाले थे। मैं घर गया, फ्रेश हुआ, अच्छे कपड़े पहने और अपनी कार लेकर वापस आया। गेट पर गाड़ी रोकते ही नजर काव्या पर पड़ी। वो वहीं खड़ी थी, बाल हवा में उड़ रहे थे।

उसने मुझे देखा और उसकी नजरें सीधी मेरी पैंट पर चली गईं। मेरा लंड फिर से तन चुका था और पैंट में तंबू की तरह उभरा हुआ था। काव्या ने साफ देख लिया।

जब मैं उसके पास पहुँचा तो उसने मुस्कुराते हुए कहा, “आर्यन… आज तो बहुत अच्छे लग रहे हो। यहाँ की लड़कियों को दूर रखना पड़ेगा।” मैंने हँसते हुए जवाब दिया, “तो तुम पास रहना… फिर कोई आएगा ही नहीं।”

काव्या जोर से हँसी। उसकी हँसी में एक मीठी सी घंटी जैसी आवाज थी। वो फिर से अंदर चली गई, लेकिन इस बार उसकी चाल में जानबूझकर थोड़ा और लचक था। उसकी गांड हिल रही थी और मैं पीछे से देखता रह गया।

रात के खाने का समय हो गया। सब लोग खाना खा चुके थे, लेकिन मैं अभी तक नहीं खा पाया था क्योंकि सुबह से व्यस्त था।

आदित्य ने कहा, “आर्यन ऊपर छत पर जाके खा ले, वहाँ शांत है।” मैं थाली लेकर छत पर चढ़ गया। मुझे नहीं पता था कि काव्या भी वहाँ होगी।

छत पर पहुँचते ही देखा… काव्या एक कोने में खड़ी थी। जैसे उसे पहले से पता हो कि मैं आने वाला हूँ। जैसे ही मैं पास पहुँचा, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे एक और कोने में खींच लिया जहाँ बिल्कुल अँधेरा था।

अचानक उसने मुझे किस कर लिया।

मैं हैरान रह गया। उसके नरम होंठ मेरे होंठों पर थे। पहले तो समझ ही नहीं आया क्या हो रहा है, फिर मैंने भी जवाब दिया। किस गहरा होता गया। काव्या की साँसें तेज हो गईं।

उसने मेरे निचले होंठ को हल्के से काटा। जब हम अलग हुए तो दोनों की साँसें उखड़ी हुई थीं।

काव्या ने धीरे से कहा, “आर्यन… मैंने तुम्हारे लिए खाना सजा के रखा है।”

वहाँ एक छोटी टेबल पर दो प्लेटें सजी थीं। मोमबत्तियाँ जल रही थीं। बिल्कुल कैंडललाइट डिनर जैसा माहौल। हम दोनों बैठ गए। खाना खाते हुए बातें होती रहीं।

काव्या मुझे अपने कॉलेज की बातें बता रही थी, मैं अपनी। आँखें बार-बार मिल रही थीं। कभी-कभी उसके हाथ से मेरा हाथ छू जाता तो दोनों सहम जाते।

खाना खत्म होने के बाद मैंने मजाक में कहा, “मीठा क्या दे रही हो?” काव्या मुस्कुराई, “अभी बताती हूँ।”

वो उठी और मेरे पास आकर मेरे पैरों के पास बैठ गई। मेरे लंड ने फिर से करवट बदली। काव्या ने मेरे होंठों पर किस किया और मेरे कान में फुसफुसाई, “I love you, आर्यन…”

मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और उसे अपनी गोद में खींच लिया। “I love you too, काव्या…”

उसके बाद हम करीब दस मिनट तक किस करते रहे। उसके होंठ इतने नरम और मीठे थे जैसे गुलाब की पंखुड़ियाँ हों। काव्या की साँसें मेरे गले पर पड़ रही थीं। मैंने उसकी कमर पकड़ रखी थी। उसकी कमीज के अंदर से उसकी गरम त्वचा महसूस हो रही थी।

काव्या अचानक उठी और बोली, “चलो… और ऊपर चलते हैं।”

हम छत के सबसे ऊपरी हिस्से पर गए जहाँ एक बिस्तर बिछा हुआ था। शायद मेहमानों के लिए। काव्या ने मेरी तरफ देखा और धीरे से बोली, “आर्यन… क्या हम दोनों एक साथ सो सकते हैं?”

उसके पूछते ही मैंने उसे पीछे से पकड़ लिया। दोनों हाथों से उसकी कमर पकड़कर अपने से सटा लिया। मेरा तना हुआ लंड उसकी गांड पर दब गया। काव्या सिसक उठी।

मैंने उसके बाल हटाकर उसकी गर्दन चूमनी शुरू कर दी। एक हाथ से उसके बोब्स दबाए। काव्या बहुत सेंसिटिव थी। महज कुछ देर में उसका शरीर गर्म हो गया। वो मेरे खिलाफ अपनी गांड रगड़ने लगी।

“आह्ह्ह… आर्यन…” उसकी हल्की कराह निकली।

मैंने उसके दोनों बोब्स को कपड़ों के ऊपर से मसलना शुरू कर दिया। काव्या का शरीर काँप रहा था। अचानक वो मेरे हाथों को पकड़कर रुकी और बोली, “डर लग रहा है… कोई आ सकता है।”

लेकिन उसकी आँखों में डर से ज्यादा चाहत थी।

मैंने उसे घुमाया और उसके होंठों पर फिर से कबजा कर लिया। इस बार किस में भूख थी। काव्या ने मेरे बाल पकड़ लिए। मेरा एक हाथ उसकी कमीज के अंदर घुस गया और उसके नंगे बोब को छू लिया। निप्पल पहले से सख्त था। मैंने उसे उंगली से दबाया।

काव्या की टांगें कमजोर पड़ गईं। वो मेरे सीने से चिपक गई। “आर्यन… बहुत अच्छा लग रहा है… लेकिन…”

मैंने उसके कान में कहा, “कोई नहीं आएगा। सब नीचे व्यस्त हैं।”

काव्या ने मेरी पैंट का बटन खोला। उसका हाथ अंदर गया और उसने मेरे लंड को पकड़ लिया। “उफ्फ… कितना सख्त है…” उसने धीरे-धीरे हिलाना शुरू कर दिया।

मैंने उसकी कमीज ऊपर कर दी। उसके गोल-गोल, कसे हुए बोब्स बाहर आ गए। मैंने झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया और चूसने लगा। काव्या जोर से सिसक उठी।

“आह्ह्ह… आर्यन… हल्के से… दर्द… नहीं… और जोर से चूसो…”

मैं दोनों बोब्स को बारी-बारी से चूस रहा था, दबा रहा था। काव्या मेरे बालों में उंगलियाँ फेर रही थी। उसका शरीर अब पूरी तरह गर्म हो चुका था।

मैंने उसकी सालवार का नाड़ा खोला। सालवार उसके पैरों तक आ गई। अंदर हल्की गुलाबी पैंटी थी जो बीच से गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी के ऊपर से उसकी चूत सहलाई। काव्या काँप उठी।

“आर्यन… वहाँ… मत…” लेकिन उसने मेरा हाथ नहीं हटाया।

मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया। उसके ऊपर लेटकर उसके होंठ चूसते हुए एक हाथ से पैंटी साइड की और उंगली उसकी चूत पर फेरी। वो पहले से गीली थी।

काव्या की आँखें बंद थीं। साँसें तेज चल रही थीं। “आह्ह्ह… आर्यन… उंगली… अंदर…”

मैंने धीरे से एक उंगली अंदर डाली। काव्या की चूत बहुत टाइट थी। जैसे ही उंगली अंदर गई, वो मेरे कंधे पर नाखून गाड़ दिए।

“आह्हhhhh… धीरे… पहली बार…”

मैंने समझ लिया। वो अभी भी कुँवारी थी।

मैंने उंगली निकालकर उसकी चूत चाटना शुरू कर दिया। काव्या का शरीर तन गया। वो दोनों हाथों से मेरा सिर अपनी जांघों के बीच दबा रही थी।

“आह्ह्ह… ओह्ह्ह… आर्यन… क्या कर रहे हो… आह्ह्ह…”

उसकी प्यारी-प्यारी कराहें रात की खामोशी में गूंज रही थीं। मैं उसकी क्लिट चूस रहा था, जीभ अंदर-बाहर कर रहा था। काव्या की टांगें काँप रही थीं।

थोड़ी देर बाद उसने मुझे ऊपर खींचा। “आर्यन… अब… मुझे तुम्हारा चाहिए…”

उसकी आँखों में पानी था… चाहत का पानी।

काव्या की आँखों में चाहत साफ दिख रही थी। उसने मेरे लंड को फिर से पकड़ लिया और धीरे-धीरे हिलाने लगी। उसकी हथेली गरम थी। मैंने उसके बालों में उंगलियाँ फेरते हुए कहा, “काव्या… तुम सच में तैयार हो?”

उसने सिर हिलाया। “हाँ… आर्यन… आज ही… मुझे डर भी लग रहा है, लेकिन मन नहीं मान रहा।”

मैंने उसे चूम लिया। इस बार किस में जल्दबाजी नहीं थी। लंबे समय तक होंठों को चूसते रहे। फिर मैंने उसके दोनों बोब्स को फिर से मुँह में ले लिया। काव्या की कराहें तेज हो गईं।

“आह्ह्ह… आर्यन… और जोर से चूसो… आह्ह्ह…”

मैंने उसकी पैंटी पूरी उतार दी। अब वो बिल्कुल नंगी थी। चाँदनी में उसका गोरा जिस्म चमक रहा था। गोल बोब्स, पतली कमर, और बीच में चमकती हुई गीली चूत।

मैंने फिर से झुककर उसकी चूत चाटी। काव्या की जांघें काँपने लगीं। वो मेरे सिर को अपनी जांघों में दबाए हुए थी।

“आह्हhhhh… आर्यन… वहाँ… मत छोड़ो… आह्ह्ह… जीभ और अंदर…”

मैंने उसकी क्लिट को चूसा और दो उंगलियाँ अंदर डाल दीं। काव्या का शरीर तन गया। “आह्ह्ह… दर्द… लेकिन अच्छा… लग रहा है… आह्ह्ह…”

थोड़ी देर बाद उसने मुझे ऊपर खींचा। “अब… डालो… प्लीज…”

मैंने अपनी पैंट पूरी उतार दी। मेरा लंड पूरी तरह तना हुआ था। काव्या ने उसे दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया। उसकी चूत का पानी मेरे लंड पर लग रहा था।

“आर्यन… धीरे से… पहली बार है…” उसकी आवाज काँप रही थी।

मैंने लंड की नोक उसकी चूत के मुँह पर रखी और धीरे से धक्का मारा। सिर्फ थोड़ा सा अंदर गया। काव्या जोर से सिसक उठी। “आह्हhhhh… दर्द… आर्यन… रुको…”

मैं रुक गया। उसके माथे पर किस किया। “दर्द हो रहा है तो बोल… मैं रुक जाऊँगा।”

काव्या ने सिर हिलाया। “नहीं… डालो… पूरा… लेकिन धीरे…”

मैंने फिर से धीरे-धीरे धक्का दिया। इस बार आधा लंड अंदर चला गया। काव्या के नाखून मेरे पीठ में गड़ गए। उसकी आँखों से आँसू निकल आए। मैंने उसके होंठ चूस लिए ताकि उसकी आवाज दब जाए।

“आह्ह्ह… आर्यन… बहुत मोटा है… आह्ह्ह…”

मैंने एक और धीमा लेकिन गहरा धक्का मारा। पूरा लंड उसकी टाइट चूत में समा गया। काव्या की साँस रुक गई। कुछ पल दोनों बस ऐसे ही रहे। मैंने हिलना बंद कर दिया। उसके बाल सहलाते हुए कहा, “अब ठीक है?”

काव्या ने धीरे से सिर हिलाया। “थोड़ा… अब… धीरे-धीरे हिलाओ…”

मैंने बहुत धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की। हर धक्के के साथ काव्या की कराह निकल रही थी। पहले दर्द की, फिर धीरे-धीरे मजे की।

“आह्ह्ह… आर्यन… अब… थोड़ा तेज… आह्ह्ह…”

मैंने स्पीड बढ़ा दी। काव्या की चूत अब थोड़ी ढीली पड़ने लगी थी। वो खुद अपनी गांड ऊपर उठा-उठा कर जवाब देने लगी। उसके बोब्स हर धक्के के साथ हिल रहे थे। मैंने एक बोब मुँह में ले लिया और चूसते हुए चोदने लगा।

“आह्ह्ह… आर्यन… और जोर से… आह्ह्ह… मेरी चूत फाड़ दो… आह्ह्ह…”

मैंने उसकी दोनों टांगें अपने कंधों पर रख लीं और गहराई तक धक्के लगाने लगा। काव्या की आवाज अब खुल चुकी थी। “आह्हhhhh… ओह्ह्ह… आर्यन… बहुत अच्छा लग रहा है… आह्ह्ह…”

कमरे में सिर्फ हमारी साँसें और शरीर की आवाजें गूंज रही थीं। मैंने उसकी गांड पकड़कर और जोर से धक्के दिए। काव्या अब पूरी तरह भीग चुकी थी। उसकी चूत मेरे लंड को चूस रही थी।

“आर्यन… मैं… झड़ने वाली हूँ… आह्ह्ह…” काव्या का शरीर अकड़ने लगा। मैंने स्पीड और बढ़ा दी। कुछ ही पल में काव्या जोर से झड़ गई। उसकी चूत ने मेरे लंड को कसकर जकड़ लिया।

मैं भी खुद को रोक न सका। “काव्या… ले… आह्ह्ह…” मैंने उसकी चूत में ही माल छोड़ दिया। गर्म वीर्य उसकी अंदर तक भर गया।

दोनों थककर एक-दूसरे से लिपट गए। काव्या के आँसू अभी भी बह रहे थे, लेकिन मुस्कुरा रही थी। मैंने उसके माथे पर किस किया। “दर्द बहुत हुआ?”

उसने सिर हिलाया। “शुरुआत में बहुत… लेकिन बाद में… बहुत अच्छा लगा।” उसने मेरे लंड को छुआ जो अभी भी उसकी चूत में था। “तुम्हारा… अभी भी अंदर है…”

मैंने धीरे से लंड बाहर निकाला। थोड़ा खून लगा हुआ था। काव्या ने देखा तो शरमा गई। मैंने उसे गले लगा लिया।

“कोई बात नहीं… पहली बार में होता है।”

काव्या मेरे सीने से चिपक गई। “आर्यन… आज के बाद… मैं पूरी तरीके से तुम्हारी हूँ। आह.. जान ”

हम दोनों कुछ देर चुपचाप लेटे रहे। छत पर हल्की ठंडी हवा चल रही थी। दूर से शादी के गाने की आवाज आ रही थी। काव्या ने धीरे से कहा, “अगर कोई पूछे तो… हम यहाँ बातें कर रहे थे।”

मैंने हँसते हुए उसके बाल सहलाए। “हाँ… बस बातें।”

काव्या की आँखों में अभी भी हल्की नमी थी, लेकिन मुस्कान साफ थी। उसने मेरे गाल पर हाथ फेरा और धीरे से कहा, “आर्यन… एक बार और… लेकिन इस बार धीरे से… जैसे सपना हो।”

मैंने उसके माथे पर किस किया। “जैसा तुम कहो।”

इस बार कोई जल्दबाजी नहीं थी। मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और धीरे-धीरे उसके पूरे शरीर को चूमने लगा। गर्दन, कॉलरबोन, फिर दोनों बोब्स।

काव्या की साँसें धीमी और गहरी हो गईं। वो मेरे बालों में उंगलियाँ फेर रही थी।

“आह्ह्ह… आर्यन… बहुत अच्छा लग रहा है…” उसकी आवाज अब कराह से ज्यादा फुसफुसाहट जैसी थी।

मैंने उसकी जांघों को सहलाते हुए फिर से उसकी चूत पर जीभ फेरी। इस बार बहुत हल्के से। काव्या की कमर हल्की सी उठ गई। वो मेरे सिर को अपने पास खींच रही थी, लेकिन जोर से नहीं… जैसे खुद को संभालते हुए।

जब मैंने फिर से लंड उसकी चूत पर रखा, तो काव्या ने खुद अपनी टांगें थोड़ी और खोल दीं। “धीरे… आर्यन…”

मैंने बहुत धीरे-धीरे अंदर प्रवेश किया। इस बार दर्द बहुत कम था। काव्या ने आँखें बंद कर लीं और मेरे कंधे पर सिर टिका दिया। पूरा लंड अंदर जाने के बाद हम दोनों कुछ पल बस ऐसे ही रहे। साँसें एक-दूसरे से मिल रही थीं।

फिर मैंने बहुत धीमी गति से हरकत शुरू की। हर धक्का कोमल था, गहरा था। काव्या मेरे कान में फुसफुसा रही थी, “आर्यन… ऐसे ही… मत रुको…”

चाँदनी उसके गोरे शरीर पर पड़ रही थी। उसकी आँखें बंद थीं, होंठ थोड़े खुले हुए। मैंने उसके हाथ को अपने हाथ में ले लिया और उंगलियाँ फँसा लीं। काव्या ने मेरी उंगलियों को कसकर पकड़ लिया।

समय जैसे रुक गया हो। न कोई जल्दबाजी, न कोई जोर। बस दो शरीर एक-दूसरे में समा रहे थे। काव्या की कराहें अब बहुत हल्की थीं… “आह्ह… हम्म… आर्यन…”

मैंने उसके माथे, आँखों और होंठों को बारी-बारी से चूमा। काव्या ने मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा, “आज के बाद… मैं तुम्हें भूल नहीं पाऊँगी।”

मैंने जवाब में सिर्फ उसे और करीब खींच लिया।

बहुत देर बाद काव्या का शरीर हल्के से काँपा। उसने मेरे गले में चेहरा छुपा लिया और धीमी आवाज में कराहते हुए चरम पर पहुँची। उसकी चूत ने मेरे लंड को हल्के से जकड़ लिया।

मैं भी उसी लय में उसके अंदर ही बिखर गया। कोई जोर की आवाज नहीं निकली… बस दोनों की साँसें एक हो गईं।

हम लंबे समय तक उसी पोजीशन में लेटे रहे। लंड अभी भी उसके अंदर था। काव्या मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी हुई थी। मैं उसके बालों को सहला रहा था।

थोड़ी देर बाद उसने धीरे से कहा, “आर्यन… अगर ये सिर्फ एक रात का सपना निकला… तो भी मुझे कोई अफसोस नहीं।”

मैंने उसका चेहरा ऊपर उठाया। “ये सपना नहीं है काव्या। लेकिन… हमें सावधान रहना होगा।”

उसने हल्के से मुस्कुराया। “मैं जानती हूँ। शादी का घर है… सब कुछ छुपाना पड़ेगा।” फिर उसने मेरे होंठों पर हल्का सा किस किया। “लेकिन आज रात… मैं तुम्हारी थी।”

हमने धीरे-धीरे कपड़े पहने। काव्या ने अपने बाल सँवारे और कमीज ठीक की। मैंने उसकी आँखों के कोने से बचा हुआ एक आँसू पोंछा।

नीचे जाने से पहले काव्या ने मेरा हाथ पकड़ा। “आर्यन… जब भी मौका मिले… मिलना।”

मैंने उसके हाथ को अपने गाल से लगाया। “मिलूँगा।”

हम दोनों अलग-अलग सीढ़ियों से नीचे उतरे। शादी के शोर में कोई कुछ नोटिस नहीं कर पाया।

रात के बाकी हिस्से में जब भी हमारी नजरें मिलतीं, काव्या हल्के से मुस्कुरा देती। मैं भी। दिल के अंदर एक अजीब सी गर्माहट थी… जैसे कोई नरम सी याद हमेशा के लिए बैठ गई हो।

उस रात के बाद हम कभी खुलकर बात नहीं कर सके।

शादी खत्म हुई, काव्या अपने शहर वापस चली गई। लेकिन कभी-कभी रात को जब अकेला होता हूँ, तो छत की वो चाँदनी, उसकी हल्की कराहें और उसके बालों की खुशबू याद आ जाती है।

जैसे कोई अधूरा सपना… जो कभी पूरी तरह खत्म नहीं होता।

तो दोस्तों आपको यह Dost Ki Bahan Ki Chudai वाली Hindi Sex Kahani कैसी लगी? नीचे कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके जरूर बताना!

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