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बेटे के सामने माँ की चूत खोल दी! वाइफ ने!

Family Group Sex : बहु ने सास को लेस्बियन बनाकर किया चुदने को तैयार! फिर बेटे ने माँ के बूब्स चूसे, चाटी चुत! फिर पूरा लंड टाइट चूत में घुसाया! घमासान शुरुवात!

Family Group Sex : बहु ने सास को लेस्बियन बनाकर किया चुदने को तैयार! फिर बेटे ने माँ के बूब्स चूसे, चाटी चुत! फिर पूरा लंड टाइट चूत में घुसाया! घमासान शुरुवात!

अभी तक आपने "सासु माँ साथ लेस्बियन और लंड का जुगाड़!" में पढ़ा :-

मैं हॉल में खड़ा दूर से देख रहा था। प्रिया माँ की चूत चाट रही थी और माँ कराह रही थीं। प्रिया ने अचानक सिर उठाया और मेरी तरफ देखा। फिर माँ से बोली, “माँ जी… विक्रम देख रहे हैं आपको।”

माँ की आँखें खुलीं। वो घबरा गईं और अपने शरीर को ढकने की कोशिश करने लगीं। लेकिन प्रिया ने उनके हाथ पकड़ लिए। “मत ढको… उन्हें देखने दो। आप कितनी खूबसूरत लग रही हो।”

माँ की साँसें तेज चल रही थीं। उनकी नजर मुझ पर थी। शर्म और इच्छा दोनों साफ झलक रहे थे।

प्रिया ने माँ की टांगें और फैला दीं। “देखो विक्रम… माँ जी की चूत कितनी गीली है। सब तुम्हारे लिए।”

मैं वहीं खड़ा रहा। मेरा लंड पैंट में तना हुआ था। माँ ने मेरी तरफ देखा और धीरे से आँखें बंद कर लीं। प्रिया मुस्कुराई और फिर से माँ को चाटने लगी।

उस रात घर में एक अजीब सी खामोशी थी। सब समझ गए थे कि अब रेखा पार होने वाली है।

अब आगे :-

उस रात के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था। माँ अब मुझसे नजरें मिलाने से कतराती थीं, लेकिन उनकी आँखों में शर्म के साथ-साथ एक अजीब सी बेचैनी भी थी। प्रिया लगातार दोनों के बीच की दूरी कम कर रही थी।

अगली शाम प्रिया ने फिर से वाइन निकाली। तीनों लिविंग रूम में बैठे थे। माँ थोड़ी शांत थीं। प्रिया ने माँ के पास जाकर उनका सिर अपने कंधे पर टिका लिया और उनके बाल सहलाने लगी। मैं सामने सोफे पर बैठा दोनों को देख रहा था।

थोड़ी देर बाद प्रिया ने माँ की तरफ देखा और धीरे से कहा, “माँ जी… आज विक्रम को भी शामिल करें?”

माँ की साँसें एक पल के लिए रुक गईं। उन्होंने मेरी तरफ देखा। मैं चुपचाप बैठा रहा। माँ ने धीरे से सिर हिलाया — न तो पूरा हाँ, न ही ना।

प्रिया समझ गई। उसने माँ की नाइटी के बटन खोलने शुरू कर दिए। माँ ने विरोध नहीं किया। धीरे-धीरे उनकी नाइटी खुल गई और उनके बड़े, भारी स्तन बाहर आ गए।

प्रिया ने एक स्तन को अपने हाथ में लिया और दूसरे की तरफ मुझे इशारा किया।

“आओ विक्रम… छुओ।”

मैं उठा और माँ के पास जाकर बैठ गया। मेरा हाथ काँप रहा था।

पहली बार मैं अपनी माँ के नंगे स्तन को छूने जा रहा था। मैंने धीरे से हाथ बढ़ाया और उनका बायाँ स्तन पकड़ लिया। गरम, मुलायम और भारी। निप्पल मेरे हाथ के स्पर्श से सख्त हो गया।

माँ ने हल्की सी सिसकारी भरी। “विक्रम…” उनकी आवाज में चेतावनी और इच्छा दोनों थे।

मैंने निप्पल को अंगूठे से सहलाया।माँ की आँखें बंद हो गईं।

प्रिया ने दूसरे स्तन को मुँह में ले लिया और चूसने लगी। मैं भी झुका और माँ के निप्पल को अपनी जीभ से छुआ। नमकीन और गरम। मैंने उसे मुँह में ले लिया और हल्के से चूसने लगा।

माँ का शरीर सिहर उठा। उन्होंने मेरे बाल पकड़ लिए। “आह्ह्ह… धीरे… बेटा…”

बेटा शब्द सुनकर मेरे अंदर कुछ और जोर से जागा। मैंने और जोर से चूसना शुरू कर दिया। प्रिया ने माँ की जांघें फैला दीं और उनकी चूत सहलाने लगी।

माँ अब दोनों तरफ से उत्तेजित हो रही थीं। उनकी कराहें कमरे में गूंजने लगीं।

प्रिया ने मेरा हाथ पकड़ा और माँ की चूत पर रख दिया। “महसूस करो… कितनी गीली हैं माँ जी।”

मेरी उंगलियाँ माँ की गीली चूत पर थीं। गर्म और चिकनी। मैंने धीरे से एक उंगली अंदर डाली। माँ की चूत ने मेरी उंगली को कस लिया। “आह्हhhhh… विक्रम… अंदर…”

मैंने उंगली धीरे-धीरे अंदर-बाहर करनी शुरू कर दी। प्रिया माँ के स्तन चूस रही थी और मैं उनकी चूत में उंगलियाँ डाले हुए था। माँ का शरीर बेकाबू हो रहा था।

थोड़ी देर बाद वो जोर से काँप उठीं और मेरे हाथ पर गीली हो गईं।

माँ शर्म से अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। प्रिया मुस्कुराई और बोली, “अब बारी विक्रम की।”

प्रिया ने मेरी पैंट खोली और लंड बाहर निकाला। वो पूरी तरह तना हुआ था। माँ की नजर मेरे लंड पर गई। उनकी आँखें थोड़ी चौड़ी हो गईं। प्रिया ने माँ का हाथ पकड़ा और मेरे लंड पर रख दिया।

“छुओ माँ जी… ये आपके बेटे का लंड है।”

माँ का हाथ काँप रहा था। उन्होंने धीरे से लंड को पकड़ा। उनकी हथेली गरम थी। उन्होंने ऊपर-नीचे हिलाना शुरू कर दिया। मैंने साँस रोक ली। अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर महसूस करना… ये एहसास अजीब और बहुत तेज था।

प्रिया ने माँ से कहा, “मुँह में लो माँ जी… बस एक बार।”

माँ ने हिचकिचाते हुए मेरी तरफ देखा। मैंने कुछ नहीं कहा। बस उनकी आँखों में देखा। माँ ने धीरे से सिर झुकाया और मेरे लंड की नोक को अपनी जीभ से छुआ। फिर उन्होंने उसे मुँह में ले लिया।

गरम और गीला। माँ का मुँह मेरे लंड के चारों तरफ बंद हो गया। उन्होंने धीरे-धीरे चूसना शुरू कर दिया। प्रिया उनके बाल सहलाते हुए बोल रही थी, “हाँ माँ जी… ऐसे ही… और गहरा…”

मैं सिर पीछे करके कराह उठा। “आह्ह्ह… माँ…”

माँ ने मेरा लंड और गहराई तक ले लिया। उनकी आँखें बंद थीं। वो चूस रही थीं जैसे सालों से तरस रही हों।

प्रिया ने माँ की चूत में फिर से उंगलियाँ डाल दीं। माँ एक साथ मेरे लंड को चूस रही थीं और प्रिया की उंगलियों पर झड़ने के करीब थीं।

थोड़ी देर बाद मैंने माँ का सिर ऊपर उठाया। “बस… अभी नहीं…”

प्रिया समझ गई। उसने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी टांगें फैला दीं। फिर मेरी तरफ देखा। “अब चाटो अपनी माँ की चुत को!”

मैं माँ की जांघों के बीच बैठ गया। उनकी चूत मेरे चेहरे के सामने थी - गीली, थोड़ी खुली हुई और उत्तेजना से चमक रही थी। मैंने जीभ आगे बढ़ाई और उनकी चूत पर फेरी। माँ की कमर उछल गई।

“आह्हhhhh… बेटा… वहाँ… आह्ह्ह…”

मैंने उनकी क्लिट को मुँह में लिया और चूसने लगा। माँ के हाथ मेरे बालों में थे। प्रिया उनके स्तन मसल रही थी और गंदी बातें कर रही थी, “देखो माँ जी… आपका बेटा आपकी चूत चाट रहा है। कैसा लग रहा है?”

माँ सिर्फ कराह रही थीं। मैंने जीभ अंदर तक डाली और उनकी चूत को अच्छे से चाटा। माँ की टांगें काँप रही थीं। थोड़ी देर बाद वो फिर से जोर से झड़ गईं। उनका पानी मेरे मुँह पर लग गया।

मैं ऊपर उठा। मेरा लंड अभी भी तना हुआ था। प्रिया ने उसे पकड़ा और माँ की चूत पर रगड़ने लगी। लंड की नोक माँ की गीली चूत पर बार-बार छू रही थी। माँ की आँखें खुली थीं। वो मुझे देख रही थीं।

“विक्रम… धीरे…” उनकी आवाज काँप रही थी।

प्रिया ने लंड की नोक को माँ की चूत के मुँह पर रख दिया। मैंने हल्का सा दबाव डाला। सिर्फ नोक अंदर गई। माँ की आँखें बंद हो गईं और उन्होंने बिस्तर की चादर कसकर पकड़ ली।

“आह्हhhhh… बहुत मोटा… बेटा…”

मैंने और अंदर धकेलने की बजाय रुक गया। प्रिया ने मेरे कंधे पर हाथ रखा। “आज बस इतना काफी है। माँ जी को और समय दो।”

मैंने लंड बाहर निकाला। माँ तेज साँसें ले रही थीं। उनके शरीर पर पसीना चमक रहा था। प्रिया ने उन्हें गले लगा लिया और मुझे भी अपने पास खींच लिया। तीनों बिस्तर पर लेटे हुए थे।

माँ ने धीरे से मेरा हाथ पकड़ा। “विक्रम… ये सब… बहुत गलत है। लेकिन… रोक भी नहीं पा रही।”

मैंने कुछ नहीं कहा। बस उनका हाथ कसकर पकड़ लिया।

उस रात हम तीनों एक साथ सो गए। कोई पूर्ण संबंध नहीं बना। लेकिन रेखा अब लगभग मिट चुकी थी।

अगली रात घर में एक अजीब सी गरमाहट थी। खाना खाते समय भी तीनों के बीच नजरे मिल रही थीं। प्रिया जानबूझकर माँ के पास बैठ गई थी और कभी-कभी उनका हाथ दबा देती थी।

माँ शर्म से मेरी तरफ देखतीं तो फिर नजरें झुका लेतीं।

रात के दस बजे प्रिया ने माँ का हाथ पकड़ा और उन्हें हमारे बेडरूम में ले आई। दरवाजा बंद करते हुए उसने मुझसे कहा, “आज रात पूरी बात निपटानी है।”

माँ बिस्तर के किनारे खड़ी थीं। उनकी साँसें पहले से तेज थीं।

प्रिया ने धीरे से उनकी नाइटी उतार दी। माँ अब पूरी तरह नंगी थीं। बड़े भारी स्तन, थोड़ी ढीली लेकिन अभी भी आकर्षक कमर, और चौड़ी गांड। प्रिया ने भी अपने कपड़े उतार दिए। फिर मेरी तरफ देखा।

“तुम भी नंगे हो जाओ।”

मैंने कपड़े उतारे। मेरा लंड पहले से ही तना हुआ था। माँ की नजर उस पर गई और उन्होंने गर्दन फेर ली। प्रिया ने माँ का चेहरा पकड़कर मेरी तरफ किया।

“देखो माँ जी… ये लंड आज आपकी चूत में जाएगा। तैयार हो?”

माँ ने हल्के से सिर हिलाया। उनकी आवाज काँप रही थी, “विक्रम… धीरे करना बेटा…”

प्रिया ने माँ को बिस्तर पर लिटा दिया और उनकी टांगें फैला दीं। फिर मेरे लंड को पकड़कर माँ की गीली चूत पर रगड़ने लगी। “देखो कितनी गीली हो गई हैं सिर्फ सोचकर।

बोलो माँ जी, बोलो कि आप अपने बेटे का लंड अपनी चूत में लेना चाहती हो।”

माँ शर्म से आँखें बंद किए हुए थीं। प्रिया ने उनकी चूत में उंगली डालकर तेजी से हिलाई। “बोलो नहीं तो रोक दूँगी।”

माँ की कराह निकली, “आह्ह्ह… हाँ… लेना चाहती हूँ… बेटे का लंड… अपनी चूत में…”

प्रिया मुस्कुराई। उसने मेरे लंड की नोक माँ की चूत के मुँह पर रख दी। “अब डालो विक्रम। अपनी माँ की चूत फाड़ दो।”

मैंने धीरे से धक्का मारा। आधा लंड अंदर चला गया। माँ की आँखें फटी की फटी रह गईं। “आह्हhhhh… बहुत मोटा है… बेटा… आह्ह्ह… धीरे…”

मैंने रुककर कहा, “माँ… आपकी चूत बहुत टाइट है।”

प्रिया माँ के स्तन दबाते हुए बोली, “पूरा डालो। माँ जी सह लेंगी। बोलो माँ जी, पूरा लंड अंदर चाहिए?”

माँ ने दाँत भींचकर कहा, “हाँ… पूरा… डाल दो बेटा… आह्ह्ह…”

मैंने एक जोर का धक्का मारा। पूरा लंड माँ की चूत में समा गया। माँ ने जोर से चीखते हुए मेरे पीठ पर नाखून गाड़ दिए। “आह्हhhhh… फट गई… विक्रम… बहुत अंदर तक चला गया…”

मैंने कुछ पल बिना हिले उनके अंदर रहा। उनकी चूत मेरे लंड को कसकर चूस रही थी। प्रिया ने माँ का मुँह चुमाते हुए कहा, “अब हिलो विक्रम। अपनी माँ को चोदो।”

मैंने धीरे-धीरे कमर चलानी शुरू की। हर धक्के पर माँ की कराह निकल रही थी। “आह्ह्ह… बेटा… और… आह्ह्ह… तुम्हारा लंड माँ की चूत को चीर रहा है…”

प्रिया ने गंदी बातें जारी रखीं, “बोलो माँ जी, कैसा लग रहा है अपने बेटे का मोटा लंड चूत में लेकर? बोलो ना रंडी बनकर।”

माँ शर्म के मारे लाल हो गईं लेकिन उत्तेजना में बोल पड़ीं, “आह्ह्ह… बहुत अच्छा लग रहा है… बेटे का लंड… माँ की चूत में… आह्ह्ह… और जोर से चोदो…”

मैंने स्पीड बढ़ा दी। बिस्तर चरचराने लगा। माँ के भारी स्तन हर धक्के के साथ हिल रहे थे। प्रिया उनमें से एक को मुँह में लेकर चूसने लगी और दूसरे को मसलने लगी।

“आह्ह्ह… प्रिया… विक्रम… दोनों… मिलकर… माँ को पागल कर रहे हो… आह्ह्ह…”

मैंने माँ की टांगें अपने कंधों पर रख लीं और और गहराई तक धक्के लगाने लगा। “माँ… आपकी चूत मेरा लंड निगल रही है… इतनी गीली हो गई है…”

माँ अब पूरी तरह खुल चुकी थीं। “हाँ बेटा… चोदो… अपनी माँ की चूत को चोदो… सालों से तरस रही थी… आह्ह्ह… और तेज…”

प्रिया ने माँ की क्लिट सहलाते हुए कहा, “सुनो विक्रम, माँ जी कह रही हैं और तेज चोदो। तो चोदो अपनी रंडी माँ को।”

मैंने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। माँ की चीखें कमरे में गूंज रही थीं। “आह्हhhhh… बेटा… मारो… अपनी माँ की चूत फाड़ दो… आह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूँ…”

थोड़ी देर बाद माँ का शरीर अकड़ गया। उनकी चूत ने मेरे लंड को जोर से जकड़ लिया और वो जोर से झड़ गईं। “आह्हhhhh… विक्रम… माँ झड़ गई… बेटे के लंड से…”

मैंने रुककर कहा, “अभी खत्म नहीं हुआ माँ।”

मैंने उन्हें कुतिया बना दिया। उनकी चौड़ी गांड मेरे सामने थी। प्रिया ने उनके बाल पकड़कर सिर ऊपर उठाया और मुझे इशारा किया। मैंने पीछे से लंड उनकी चूत में डाल दिया और जोर से पेलने लगा।

“आह्ह्ह… बेटा… इस पोजीशन में और गहरा जा रहा है… आह्ह्ह… चोदो… अपनी माँ की गांड हिला-हिला कर चोदो…”

प्रिया उनके मुँह के पास अपना चेहरा ले जाकर बोली, “बोलो माँ जी, आप क्या बन गई हो आज?”

माँ कराहते हुए बोलीं, “रंडी… अपने बेटे की रंडी… आह्ह्ह… विक्रम की रंडी माँ…”

मैं उनकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोद रहा था। “माँ… आपकी ये मोटी गांड… और ये टाइट चूत… मुझे पागल कर रही है।”

प्रिया ने माँ के नीचे सरककर उनकी क्लिट चाटनी शुरू कर दी जबकि मैं पीछे से पेल रहा था। माँ बिल्कुल बेकाबू हो गईं। “आह्हhhhh… दोनों… क्या कर रहे हो… माँ पागल हो जाएगी… आह्ह्ह…”

मैंने स्पीड और बढ़ा दी। “माँ… मैं अंदर छोड़ने वाला हूँ… आपकी चूत में…”

माँ ने पीछे हाथ बढ़ाकर मेरी जांघ पकड़ ली। “हाँ बेटा… छोड़ दो… माँ की चूत में अपना दूध भर दो… आह्ह्ह…”

मैंने आखिरी जोरदार धक्के मारे और माँ की चूत में ही झड़ गया। गर्म वीर्य उनकी अंदर तक भर गया। माँ भी फिर से काँपते हुए झड़ गईं।

हम तीनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। माँ की चूत से मेरा वीर्य बाहर बह रहा था। प्रिया ने उसे उंगली से उठाकर माँ के मुँह में डाल दिया। माँ ने बिना हिचकिचाहट के चूस लिया।

प्रिया मुस्कुराई, “अब हम तीनों एक हो गए।”

माँ ने आँखें बंद करके मेरा हाथ पकड़ लिया। “विक्रम… अब माँ तुम्हारी है… जब चाहो चोदना…”

उस रात के बाद घर का रहन-सहन पूरी तरह बदल गया। सुबह नाश्ते की मेज पर भी तीनों के बीच एक अलग तरह की खामोशी और समझ थी।

माँ अब मुझसे नजरें चुराने की बजाय कभी-कभी जानबूझकर देखतीं। प्रिया दोनों के बीच की कड़ी बनी हुई थी।

अगले दिन दोपहर में प्रिया ने माँ को बाथरूम में ले जाकर नहलाया। दरवाजा खुला छोड़ दिया था। मैं बाहर से देख सकता था।

प्रिया माँ के शरीर पर साबुन लगा रही थी - स्तनों पर, पेट पर, फिर जांघों के बीच। माँ की आँखें बंद थीं। प्रिया ने मेरी तरफ देखा और इशारा किया।

मैं अंदर चला गया। नहाते हुए ही मैंने माँ को दीवार से सटा दिया और उनके गीले स्तनों को मसलते हुए पीछे से लंड उनकी चूत में डाल दिया। पानी की धार के नीचे उनकी कराहें गूंजने लगीं।

“आह्ह्ह… बेटा… बाथरूम में… आह्ह्ह… जोर से…”

प्रिया एक तरफ खड़ी माँ के स्तन दबा रही थी और गंदी बातें बोल रही थी, “देखो माँ जी कैसे अपने बेटे का लंड ले रही हैं। दिन में, नहाते हुए… पूरी रंडी बन गई हो।”

माँ शर्म के बजाय अब मजे ले रही थीं। “हाँ… रंडी बन गई… अपने बेटे की… आह्ह्ह… और पेलो विक्रम…”

मैंने उन्हें वहीं झड़ाया। फिर प्रिया को भी दीवार से सटाकर चोदा जबकि माँ हमारे बगल में खड़ी साँसें ले रही थीं।

रात को तीनों फिर एक बिस्तर पर थे। इस बार प्रिया ने माँ को 69 पोजीशन में लिटाया। माँ प्रिया की चूत चाट रही थीं और प्रिया माँ की। मैंने पीछे से माँ की चूत में लंड डाल दिया। माँ की आवाज प्रिया की चूत में दब गई।

“उम्मम्म… उम्म…”

प्रिया बीच-बीच में सिर उठाकर बोल रही थी, “माँ जी की चूत कितनी अच्छी चूस रही है लंड को। बोलो विक्रम, कैसी लग रही है अपनी माँ की फुद्दी?”

“बहुत टाइट… और गरम… माँ की चूत लंड निगल रही है…”

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे। माँ की गांड मेरे हाथों में थी। मैंने उन पर थप्पड़ भी मारे। माँ और जोर से प्रिया को चाटने लगीं। थोड़ी देर बाद तीनों लगभग एक साथ झड़ गए।

अगले कुछ हफ्तों में ये सिलसिला नियमित हो गया। कभी मैं सिर्फ माँ को चोदता, प्रिया एक तरफ बैठी खुद को छूती। कभी दोनों औरतों को बारी-बारी से।

एक रात प्रिया ने माँ को बिस्तर पर लिटाकर उनके हाथ बाँध दिए।

“आज माँ जी सिर्फ लेने वाली हैं,” प्रिया ने कहा।

मैंने पहले माँ के मुँह में लंड दिया। माँ अब बिना हिचकिचाहट के पूरा लंड गले तक ले रही थीं। लार उनके मुँह से बह रही थी। फिर मैंने उनकी चूत में डाला और प्रिया उनकी क्लिट सहलाती रही। माँ बार-बार झड़ रही थीं।

एक दिन कार में जाते समय प्रिया ने पीछे बैठकर माँ की नाइटी ऊपर की और उनकी चूत में उंगलियाँ डाल दीं। मैं ड्राइविंग करते हुए आईने से देख रहा था।

माँ मुँह दबाए कराह रही थीं। घर पहुँचते ही मैंने दोनों को लिविंग रूम में ही नंगा किया। पहले प्रिया को सोफे पर चोदा, फिर माँ को कुतिया बनाकर।

माँ अब खुद मांगने लगी थीं। एक सुबह जब प्रिया बाजार गई हुई थी, माँ मेरे कमरे में आईं। दरवाजा बंद करके बोलीं, “बेटा… आज अकेली हूँ… चोद लो माँ को।”

मैंने उन्हें बिस्तर पर गिराया और बिना किसी प्रस्तावना के लंड उनकी चूत में डाल दिया। माँ ने पैर फैलाए और बोलीं, “आज जोर से… जैसे रंडी को चोदते हो वैसे…”

मैंने उनके बाल पकड़कर जोर-जोर से पेलने शुरू कर दिए। “माँ… आप अब पूरी तरह मेरी रंडी बन गई हो।”

“हाँ बेटा… तुम्हारी रंडी माँ… आह्ह्ह… मारो… चूत फाड़ दो…”

उस दिन मैंने उन्हें दो बार चोदा। एक बार चूत में, एक बार उन्होंने खुद गांड में लेने को कहा। प्रिया के सिखाने के बाद अब माँ एनल भी लेने लगी थीं।

समय के साथ हम तीनों एक अजीब से लेकिन संतुष्ट परिवार में बदल गए। बाहर से सब सामान्य दिखता। माँ पड़ोसियों से बातें करतीं, प्रिया घर संभालती, मैं ऑफिस जाता। लेकिन रात होते ही दरवाजे बंद हो जाते और तीनों का खेल शुरू हो जाता।

एक रात सब कुछ खत्म होने के बाद माँ मेरे सीने पर लेटी हुई थीं। प्रिया दूसरी तरफ थी।

माँ ने धीरे से कहा, “विक्रम… पहले लगता था जिंदगी खत्म हो गई है। अब लगता है… नई जिंदगी शुरू हुई है।”

प्रिया हँसी, “माँ जी अब कहाँ रुकने वाली हैं। अभी तो और सिखाना बाकी है।”

मैंने दोनों को अपनी बाहों में ले लिया। खिड़की के बाहर शहर की रोशनियाँ जल रही थीं। घर के अंदर हम तीनों की साँसें एक लय में चल रही थीं।

अब ये हमारा राज था। एक ऐसा राज जिसमें माँ, बेटा और बहू सब एक-दूसरे के शरीर के हिस्से बन चुके थे।

तो दोस्तों आप सभी को यह Family में हुई Biwi के साथ Group में Maa Ki Chudai की Hindi Sex Kahani कैसी लगी कॉमेंट में जरूर बताए!

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